बीएसएफ का दायरा बढ़ाने पर पंजाब में सियासत तेज, बादल ने इसके बहाने छेड़ी विपक्षी एकता की बहस

Politics on BSF पंजाब में सीमा सुरक्षा बल के बार्डर एरिया में दायरा बढ़ाए जाने के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। इसके बहाने पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने विपक्षी दलों की एकता की बहस छेड़ दी है।

Sunil Kumar JhaSat, 16 Oct 2021 03:31 PM (IST)
पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल। (फाइल फोटो)

चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। Politics on BSF Rang: बार्डर क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल (BSF) का दायरा बढ़ाने को लेकर पंजाब में नई राजनीति शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री व शिरोमणि अकाली दल के वयोवृद्ध नेता प्रकाश सिंह बादल ने सीमा सुरक्षा बल का दायरा बढ़ाने के मुद्दे पर जिस तरह का बयान दिया है उससे केंद्र और राज्यों के संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बादल ने इस मामले के बहाने विपक्षी दलों की एकता की पहल भी कर दी है। खास बात यह है कि प्रकाश सिंह बादल को अब कांग्रेस के साथ आने को भी तैयार हैं, जिसे वह किसी समय कांग्रेस को अपनी दुश्मन नंबर वन पार्टी कहा करते थे। बादल ने कहा, मैं सभी राजनीतिक दलों से कहना चाहता हूं कि आपस में लड़ना बंद करें तथा केंद्र के ऐसे कदमों के खिलाफ मिलकर लड़ें।

पंजाब में उठने लगी सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग

बादल ने कहा कि यह किसी पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है जो भी पार्टी इसके खिलाफ लड़ेगी, शिरोमणि अकाली दल उसके पीछे लगने को तैयार है। उन्होंने कहा, शिअद सुर्खियों में आना नहीं चाहता। प्रकाश सिंह बादल के इस बयान के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता और श्री आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी ने भी उनके सुर में सुर मिलाया है। उन्होंने आज एक ट्वीट करके कहा, प्रकाश सिंह बादल जो सुझाव दे रहे हैं उसमें दम है।

Manish Tewari

@ManishTewari

There is Merit in what Sardar Prakash Singh Badal is suggesting.This should be fought jointly above partisan considerations.

The State Government should

a) Call a Meeting of all LS/ RS MP’s.

B) Call an all party meeting.

C) Challenge notification in Court

मनीष तिवारी ने कहा है कि इसे पक्षपातपूर्ण विचारों से ऊपर उठकर संयुक्त रूप से लड़ा जाना चाहिए। अपनी ही पार्टी कांग्रेस की राज्य सरकार को तीन सुझाव देते हुए उन्होंने कहा इस मामले को लेकर सभी लोकसभा सांसदों और राज्यसभा सदस्यों की बैठक बुलाई जाए। सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए।

ऐसा पहली बार हुआ है कि सार्वजनिक तौर पर शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के नेता एक दूसरे के विचारों का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि इस मामले में पूर्व मुख्मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इन नेताओं से ठीक विपरीत विचार रखते हैं। उनका कहना है कि बीएसएफ का दायरा बढ़ने से सीमा पार से आने वाले हथियारों और ड्रग्स की तस्‍करी को रोकने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। लेकिन, ज्यादातर पार्टियां इसे राज्यों के अधिकारों में हनन के रूप में देख रही हैं। आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल सिंह चीमा हों या भगवंत मान या फिर पंजाब मामलों के सह प्रभारी राघव चड्ढा , सभी इसे संघीय ढांचे को कमजोर करने के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।

हरपाल चीमा ने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। आम आदमी पार्टी केंद्र द्वारा उठाए इस कदम के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को जवाबदेह मान रही हैं। पार्टी के पंजाब मामलों के सह प्रभारी राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार 2015 से लेकर आज तक दिल्ली की जनता के हक और अधिकारों के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के साथ लड़ती आ रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बूते दिल्ली में संघीय ढांचा मजबूत है और दिल्ली के मतदाताओं की शक्ति के साथ संघीय ढांचा कायम है।

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