वन चाइना पॉलिसी हो खत्म : तेनजिन चुंडु

वन चाइना पॉलिसी हो खत्म : तेनजिन चुंडु

यह बातें वीरवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से दिल्ली की पैदल यात्रा पर निकले तिब्बती लेखक और समाज सेवी तेनजिन चुंडु ने कही। पैदल यात्रा के दौरान तेनजिन चुंडु चंडीगढ़ पहुंचे थे।

JagranThu, 25 Feb 2021 06:17 PM (IST)

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : चीन जहां पर भी काम करता है, उसे खुद के अधीन बताता है। साल 1949 से पहले चीन की स्थिति कुछ अलग थी। इस समय वह अपनी विस्तारवादी नीति के तहत तिब्बत, ताईवान, हांगकांग सहित करीब दस से भी ज्यादा देशों पर कब्जा कर चुका है। यह सारा कार्य चीन की वन चाइना पॉलिसी के तहत हो रहा है। भारत ने कभी भी उस पॉलिसी का विरोध नहीं किया, लेकिन अब गलवन घाटी हादसे के बाद भारत को इस नियम को खत्म करने की दिशा में काम करने की जरूरत है। यह बातें वीरवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से दिल्ली की पैदल यात्रा पर निकले तिब्बती लेखक और समाज सेवी तेनजिन चुंडु ने कही। पैदल यात्रा के दौरान तेनजिन चुंडु चंडीगढ़ पहुंचे थे। जहां पर प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि भारत चाइना की धारणा को नियंत्रित कर सकता है। भारत की ओर से विश्व स्तर पर इस मुद्दे को उठाकर चीन के इरादों पर चोट पहुंचाने की जरूरत है। इसके बाद भारत की राजनीति के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और तिब्बत को भी आजादी मिलेगी। तेनजिन चुंडु दिल्ली पहुंचकर भारत सरकार को मांग पत्र देंगे, जिस पर हजारों लोगों के हस्ताक्षर होंगे। भारत के साथ हुआ है विश्वासघात

तेनजिन चुंडु ने कहा कि 1962 में युद्ध होने के बाद भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए थे, लेकिन गलवन घाटी की घटना से भारत के विश्वास को चोट पहुंचा। उन्होंने कहा कि भारत चीन के हर नियम को खत्म करने की ताकत रखता है। इस समय भारत आत्मनिर्भर देश बनने की दिशा में काम कर रहा है, जो कि पूरी तरह से सही है। तिब्बत के लोग चीन के अधीन नहीं रहना चाहते। इसके चलते 80 हजार से ज्यादा तिब्बती लोग भारत में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं। यहां तक कि हमारे धर्म गुरु भी हिमाचल में जाकर बसे हुए हैं। तिब्बत के लोगों को भारत में रहते हुए पांच दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका है। भारत हमें शरण दे रहा है, लेकिन यदि भारत चाहे तो तिब्बत को आजादी मिल सकती है।

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