चंडीगढ़ कांग्रेस के नए अध्यक्ष सुभाष चावला ताजपोशी समारोह में चला गप्पों का दौर, जानें क्या था मामला

सेक्टर-35 के कांग्रेस भवन में कुर्सी संभालने के बाद सुभाष चावला का मुंह मीठा करते पवन बंसल और हरीश रावत।

चंडीगढ़ कांग्रेस के नए अध्यक्ष सुभाष चावला की रविवार को ताजपोशी हुई। समारोह में कई बड़े नेता शामिल हुए थे। लेकिन इस दौरान पांच से छह महिला नेत्रियों का ज्यादा ध्यान मंच पर अपने नेताओं के संबोधन को सुनने से ज्यादा आपस में गप्पे लड़ाने पर था।

Ankesh KumarMon, 22 Feb 2021 11:37 AM (IST)

चंडीगढ़ जेएनएन। कांग्रेस के नवनियुक्त चंडीगढ़ अध्यक्ष सुभाष चावला की रविवार को ताजपोशी हुई, लेकिन इस दौरान पांच से छह महिला नेत्रियों का ज्यादा ध्यान मंच पर अपने नेताओं के संबोधन को सुनने से ज्यादा आपस में गप्पे लड़ाने पर था। नेता क्या बोल रहे हैं, उस पर उनका कोई फोकस नहीं दिखा। पहले तो यह महिलाएं मीडिया कर्मियों के लिए तय कुर्सियों पर बैठ गईं। कई नेताओं ने महिलाओं को इसके लिए मना भी किया, लेकिन फिर भी वह नहीं मानीं।

इन नेत्रियों ने कहा कि जब मीडिया वाले आएंगे तो वह उठ जाएंगी। जिस समय नवनियुक्त अध्यक्ष सुभाष चावला और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भाषण दे रहे थे, तब भी वह हंस-हंस कर अपनी ही बातें करने में व्यस्त दिखीं। इसके साथ ही कई कार्यकर्ता मंच के सामने ही खड़े नजर आए, जिनका ध्यान सिर्फ सीनियर नेताओं को अपनी शक्ल दिखाने पर था। मंच का संचालन कर रहे पूर्व डिप्टी मेयर एचएस लक्की ने कई बार अनुशासनहीनता न करने की अपील की, लेकिन लक्की की बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

 

कुछ मीठा हो जाए

नगर निगम के सदन की बैठक की शुरुआत अब टाफियों से होती है। जी हां प्रत्येक बैठक में हर अधिकारी और पार्षद के सामने टॉफियों की कटोरी रख दी जाती है। ऐसे में जब भी किसी का मूड होता है वह अपना मुंह मीठा कर लेता है। हालांकि टाफियां खिलाने की शुरुआत पिछले साल तत्कालिन मेयर राजबाला मलिक ने की थी। ऐसे में टाफियां बांटने का सिलसिला वर्तमान मेयर रविकांत शर्मा ने भी जारी रखा है। सदन में पार्षद हंगामा भी करते हैं। ऐसे विपक्ष और पक्ष के पार्षद एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाते हुए कई बार गुस्से में आ जाते हैं। इस बीच यह टाफियां काफी काम करती है। कई पार्षदों का कहना है कि टाफियां खाकर बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं, क्योंकि अब तो कभी स्पेशल टाफियां खाने का मौका ही नहीं मिलता है।

रंजीता की बदली राजनीति

पंचकूला की नेत्री रंजीता मेहता अपनी भूमिका काफी अच्छे से निभाती हैं। जिस समय वह कांग्रेस में थीं तो कांग्रेस प्रवक्ता के तौर पर भाजपा पर खूब आरोप लगाती रहीं। कांग्रेस में रहते हुए जिनका वह बचाव करती थी, अब वह उन पर खुलकर आरोप लगाती नजर आती हैं। पंचकूला नगर निगम के चुनाव के दौरान उन्होंने पाला बदल लिया और अब  भाजपा में हैं। ऐसे में भाजपा में आने के बाद वह कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार का बचाव करते हुए नजर आती हैं। मीडिया डिबेट और राजनीतिक कार्यक्रम में उन्हें देखा जा सकता है। ऐसे में उन्हें चर्चा करते हुए देखने वाला कोई इतनी आसानी से नहीं कह सकता कि वह कभी कांग्रेस में भी रही होंगी। हालांकि वह जिस तरह से कांग्रेस में सक्रिय थीं, इसी तरह से वह भाजपा में भी हैं। हाल ही में जीरकपुर के निकाय चुनाव में उन्होंने जमकर कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए भाजपा की उम्मीदवार मीना शर्मा के पक्ष में प्रचार किया था।

 

जिंदाबाद नहीं मुर्दाबाद के नारे

15 फरवरी को डोर टू डोर गारबेज कलेक्टर्स के साथ एमओयू साइन करने के लिए नगर निगम के सदन की विशेष बैठक बुलाई गई। बैठक के बाद नगर निगम के बाहर पिछले दो माह से धरने पर बैठे कलेक्टर्स का धरना खत्म करवाने के लिए खुद मेयर रविकांत शर्मा पहुंच गए। इस मौके पर मनोनीत पार्षद सचिन लोहटिया और डिप्टी मेयर फरमिला देवी भी मौजूद थे। इन नेताओं को उम्मीद थी कलेक्टर्स की मांगें पूरी होने के बाद उनकी वाहवाही में जिदांबाद के नारे लगेंगे, लेकिन हुआ इसके उलट। इस दौरान उनकी मौजूदगी में मेयर के साथ खड़ी महिला कलेक्टर मुर्दाबाद के नारे लगाने लगी। अन्य नेताओं ने उन्हें नारे लगाने से रोकने का काफी प्रयास किया, लेकिन महिला नहीं मानी। महिला को किसी ने यह नहीं बताया कि उनकी मांगें पूरी हो गई हैं। इस घटना का वीडियो भी बन गया और वाट्सएप ग्रुपों में यह वीडियो खूब वायरल हुआ। असल में पिछले दो माह से धरने पर बैठे कलेक्टर्स ने नगर निगम और मेयर के खिलाफ हर दिन नारेबाजी की थी।

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