सिद्धू का बुर्ज जवाहर सिंह दौरा और कुंवर विजय प्रताप का इस्तीफा कोई रणनीति या संयोग, जानें पूरा मामला

कुंवर विजय प्रताप सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की फाइल फोटो।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला एक बार फिर से चुनावी साल में तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला एसआइटी के सदस्‍य आइपीएस कुंवर विजय प्रताप के स्‍वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी और नवजोत सिंह सिद्धू के बुज्र जवाहर सिंह के दौरे से गर्मा गया है।

Sunil Kumar JhaWed, 14 Apr 2021 07:17 AM (IST)

चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला एक बार फिर से चुनावी साल में तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर हो रही उठा पटक से साफ है कि आने वाले कुछ ही दिनों में एक बार फिर से बरगाड़ी में मोर्चा लगना तो तय है लेकिन सवाल यह है कि मंगलवार को बैसाखी के अवसर पर इसी मुद्दे को लेकर दो घटनाओं का एक ही दिन होना क्या संयोग है या किसी सोची समझी रणनीति का हिस्सा। ये दो घटनाक्रम हैं पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का बुर्ज जवाहर‍ सिंह का दौरा और कोट कपूरा गोली कांड की जांच के लिए गठित एसआइटी के सदस्‍य आइपीएस कुंवर विजय प्रताप सिंह की स्‍वैच्छिक सेवानिवृति की मांग।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटना जुलाई 2015 में हुई थी और तब से लेकर वहां कई मोर्चे लगे, प्रदर्शन हुए, गोलीकांड हुए, फिर मोर्चे लगे लेकिन पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू कभी वहां नहीं गए। लेकिन, मंगलवार को वह अचानक  फरीदकोट के गांव बुर्ज जवाहर सिंह पहुंच गए। वहां उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही वह ड्रग्स को लेकर एसटीएफ की ओर से दी गई रिपोर्ट के बारे में बोलना नहीं भूले।

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एसटीएफ की रिपोर्ट पिछले तीन सालों से हाई कोर्ट में सीलबंद पड़ी है। निश्चित तौर पर इन दो बड़े मुद्दों जिनको चुनाव से पहले खूब उछालकर कैप्टन अमरिंदर सिंह सत्ता में आए थे अब उनके सिर का दर्द बनते जा रहे हैं। उस पर उनकी अपनी ही पार्टी के सीनियर नेता नवजोत सिद्धू इन मुद्दों को उछालकर उनके लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं।

अभी ये मामले सुलटे भी नहीं थे कि कोटकपूरा गोली कांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम के प्रमुख कुंवर विजय प्रताप सिंह ने आइपीएस सेवा  से इस्तीफा दे दिया और स्‍वैच्छिक सेवानिवृति मांगी हालांकि सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने इसे नामंजूर कर दिया है। लेकिन, हाई कोर्ट द्वारा उन्हें हटाने के फैसले व नई एसआइटी बनाने के फैसले ने शिरोमणि अकाली दल को बड़ी राहत जरूर दी है। शिअद के प्रधान सुखबीर बादल का कहना है कि यह कमेटी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए नहीं बनाई गई है बल्कि अकाली दल व बादल परिवार को बदनाम करने के लिए बनाई है।

दरअसल नवजोत सिद्धू को गांव बुर्ज जवाहर सिंह जाना, कई सवाल भी खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या वह इस मुद्दे के जरिए अपने लिए नई राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जस्टिस रंजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पर विधानसभा में भी बहस करवाई थी। तब भी सिद्धू विधानसभा में कैप्टन के सामने झोली फैलाकर खड़े हो गए थे और कहा था कि इस मामले को सिरे चढ़ाओ। अब जबकि कैप्टन सरकार का आखिरी चुनावी साल है में नवजोत सिद्धू हाशिए पर हैं और उनके किसी अन्य पार्टी में जाने की कयासबाजी चल रही हैं से पूर्व उनका श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और ड्रग्स मामले को हवा देना नए समीकरण बनाने की ओर संकेत जरूर कर रहा है।

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