दिल्ली में सिद्धू, कल साफ होगा अध्यक्ष रहेंगे या नहीं, लखीमपुर खीरी के वायरल वीडियो पर पार्टी गंभीर

नवजोत सिद्धू ने 28 सितंबर को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से उनके इस्तीफे को लेकर असमंजस की स्थिति है। सिद्धू ने न तो अभी तक इस्तीफा वापस लिया है और न ही पार्टी ने इसे मंजूर किया है।

Ankesh ThakurWed, 13 Oct 2021 11:56 AM (IST)
नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे पर कल हाईकमान अंतिम फैसला लेगा।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहेंगे या नहीं, इस पर हाईकमान अंतिम फैसला लेगा। अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पार्टी अंतिम फैसले पर पहुंचना चाहती है। इसके लिए सिद्धू को 14 अक्टूबर वीरवार को दिल्ली तलब किया गया है। यह जानकारी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत ने ट्वीट करके दी है।

सिद्धू ने 28 सितंबर को कैबिनेट मंत्रियों के विभाग आबंटित करने के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से उनके इस्तीफे को लेकर असमंजस की स्थिति है। सिद्धू ने न तो अभी तक इस्तीफा वापस लिया है और न ही पार्टी ने इसे मंजूर किया है। माना जा रहा है कि 14 अक्टूबर को होने वाली बैठक में स्पष्ट होगा कि पार्टी का सिद्धू को लेकर क्या रुख रहने वाला है। इस बैठक में हरीश रावत के अलावा पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल भी होंगे।

पार्टी के पर्यवेक्षक हरीश चौधरी और कैबिनेट मंत्री परगट सिंह के हस्तक्षेप के बाद सिद्धू के प्रदेश प्रधान पद पर बने रहने को लेकर तस्वीर स्पष्ट होने लगी थी, लेकिन लखीमपुर खीरी की यात्रा शुरू करने के समय सामने आए सिद्धू के वीडियो से स्थिति बदलने लगी। वायरल हुए वीडियो में सिद्धू मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ अपशब्द और पार्टी के डूबने की बात कर रहे थे। पार्टी ने सिद्धू के इस वीडियो को गंभीरता से लिया। रावत ने भले ही एक दिन पहले कहा कि सिद्धू ही प्रदेश प्रधान हैं, लेकिन सिद्धू के मुख्यमंत्री चन्नी के साथ रिश्ते जिस तरह से बिगड़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए कांग्रेस को चिंता होने लगी है कि इस स्थिति में 2022 की नाव पार नहीं होने वाली है। यही कारण है कि सिद्धू को दिल्ली तलब किया गया है।

ये नेता सिद्धू को लेकर उठा चुके हैं सवाल

अहम यह है कि 16 अक्टूबर को कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक होगी। इसमें कांग्रेस के संगठन पर चर्चा होनी है। सिद्धू के इस्तीफे और कांग्रेस द्वारा उन्हें मनाने की कोशिशों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नजर पंजाब पर टिकी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही सवाल उठा चुके हैं कि आखिर कांग्रेस की ऐसी कौन सी मजबूरी है जो वह सिद्धू को ढो रही है। वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल भी कह चुके हैं कि आखिर प्रधान लगाने को लेकर फैसले कौन कर रहा है, जबकि कांग्रेस के पास स्थायी प्रधान ही नहीं है। कांग्रेस की चिंता यह है कि वर्किंग कमेटी में कहीं सिद्धू का प्रकरण न उठ जाए। ऐसे में वह 14 अक्टूबर को ही बैठक करके सारी स्थिति को स्पष्ट कर लेना चाहती है।

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