पंचकूला के मोरनी में पेड़ पर चढ़ने से आता है मोबाइल नेटवर्क, फिर होती है ऑनलाइन पढ़ाई

पंचकूला के मोरनी में पेड़ पर चढ़ने से आता है मोबाइल नेटवर्क, फिर होती है ऑनलाइन पढ़ाई
Publish Date:Sat, 19 Sep 2020 08:12 PM (IST) Author:

पंचकूला/चंडीगढ़, जेएनएन। पंचकूला के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में स्टूडेट्स को जान जोखिम में डालकर ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है। इस क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की बड़ी समस्या है। सिग्नल पाने के लिए किसी छात्र या युवक को पेड़ पर चढ़ना पड़ता है। सब कुछ कैसे होता है, यह जानकर आप भी दांत तले अंगुली दबाने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

दरअसल, यहां मोबाइल के जरिये ऑनलाइन स्टडी करने वाले स्टूडेंट्स एक विशेष क्षेत्र में इकट्ठे होते हैं। जमीन पर नेटवर्क की समस्या रहती है। इस कारण किसी युवक या छात्र को पहले एक ऊंचे पेड़ की टहनी पर चढ़ना पड़ता है। वहां पहुंचकर वह मोबाइल नेटवर्क के लिए एक हाथ में पकड़ा मोबाइल ऊपर उठाता है और दूसरे से पेड़ को पकड़ कर रखता है। जैसे ही वाट्सएप पर स्कूल असाइनमेंट आ जाता है, वह नीचे उतर आता है। फिर इसे अन्य स्टूडेंट्स के साथ शेयर करता है। बाद में इसी तरह होमवर्क सेंड किया जाता है।

ग्रामीण बोले- लंबे समय से है नेटवर्क की समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। वर्षों बाद भी मोबाइल नेटवर्क मोरनी में नहीं पहुंचा है। मोरनी के गांव दापाना के युवकों ने बताया कि पेड़ के नीचे बैठ इस गांव के अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल से ऑनलाइन होम वर्क मिलता है। पेड़ पर चढ़कर असाइनमेंट प्राप्त करने के बाद वह सभी को इसे पढ़कर सुनाता है।

मोरनी ब्लॉक के 83 स्कूलों में पढ़ते हैं करीब साढ़े तीन हजार विद्यार्थी

पंचकूला के मोरनी ब्लॉक में 83 स्कूल हैं, जिनमें करीब साढ़े तीन हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। पंचकूला से मोरनी वाया माधना से करीब 35 किलोमीटर के सफर में 25 किलोमीटर का रास्ता बिल्कुल सुनसान व जंगली है। यहां पर किसी भी कंपनी का नेटवर्क नहीं है। वहीं मोरनी से रायपुररानी के बीच करीब 25 किलोमीटर में से 15 किलोमीटर के रास्ते पर नेटवर्क की समस्या है। क्षेत्र की सबसे बड़ी पंचायत माधना या हरियाणा राज्य की सबसे ऊंचा पर्वतीय क्षेत्र टिपरा (करोह) पंचायत में बसे गांव हो, यहां पर लोगों को रोजाना इस समस्या का सामना करना पड़ता है। 

स्टूडेंट्स बोले- पेड़ पर चढ़ने वाला नहीं मिलने पर होती है दिक्कत

छात्रा रिया ठाकुर ने कहा कि उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। इसलिए एक युवक को पेड़ पर चढ़ाते हैं। नेटवर्क मिलने पर वह हमें स्कूल से मिले होमवर्क के बारे में बताता है। उसकी आधार पर हम अपनी पढ़ाई करते हैं। कई बार पेड़ पर चढ़ने वाला कोई नहीं होता तो हमें अपनी पढ़ाई करने में और मुश्किल होती है।

हालात को लेकर अधिकारी भी चिंतित

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी निरूपमा कृष्णन ने बताया कि खंड के अधिकतर विद्यालयों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या बच्चों की शिक्षा में बाधा है। पिछले दिनों मोरनी के बैहलों गांव में अध्यापकों के साथ इस मुद्दे पर बैठक हुई थी। यह समस्या उच्चाधिकारियों के भी ध्यान में लाई गई है। आज के समय में बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए मोबाइल नेटवर्क ढूंढना पड़ रहा है, यह बड़ी बिडंबना है। इस समस्या का समाधान जरूर किया जाना चाहिए।

 

 

 

 

 

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