चंडीगढ़ आना पसंद नहीं कर रहे मेहमान परिंदे, सर्दियों में सुखना लेक में होता था बसेरा, जानें कारण

चंडीगढ़ की लाइफलाइन सुखना लेक इन दिनों सैकड़ों मेहमान परिंदों का आशियाना होती थी। हजारों मील का सफर तय कर प्रवासी पक्षी सुखना लेक पहुंचते थे। कई महीने तक यहां रहने के बाद वह गर्मियों की शुरुआत में वापस अपने जहां लौटते थे।

Ankesh ThakurSun, 28 Nov 2021 12:43 PM (IST)
हजारों मील का सफर तय कर प्रवासी पक्षी सुखना लेक पहुंचते थे।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ पर्यटकों के लिए ही नहीं बल्कि विदेशी मेहमान परिंदों (Migratory Birds) की भी पंसदीदा जगह है। सर्दियों में माइग्रेटरी बर्ड्स चंडीगढ़ का रुख करते हैं और यहां कई दिन रुकते भी हैं, लेकिन इस बार नजारा अलग ही है।

चंडीगढ़ की लाइफलाइन सुखना लेक इन दिनों सैकड़ों मेहमान परिंदों का आशियाना होती थी। हजारों मील का सफर तय कर प्रवासी पक्षी सुखना लेक पहुंचते थे। कई महीने तक यहां रहने के बाद वह गर्मियों की शुरुआत में वापस अपने जहां लौटते थे। लेकिन इस बार इन मेहमान परिंदों का सुखना से माेहभंग हो गया है। पहले तो नवंबर के पहले सप्ताह में ही यह पक्षी चंडीगढ़ पहुंच जाते थे। लेकिन अब दिसंबर शुरू होने के दो दिन रहने तक भी यह कहीं दिखाई नहीं देते हैं। इसका कारण यह है कि मेहमान परिंदों का साल दर साल चंडीगढ़ से नाता टूट रहा है।

मेहमान परिंदों की संख्या कम होना का मुख्य कारण

सुखना लेक से मेहमान परिंदों का नाता टूटने के दो मुख्य कारण है। एक तो सुखना लेक पर बढ़ती एक्टिविटी और लोगों की आवाजाही इसका कारण बन रही है। सुखना कैचमेंट एरिया तक में लोगों का दखल बढ़ा है। इसके अलावा सुखना लेक का बढ़ा जलस्तर भी इसका कारण है। पानी का स्तर पिछले कई वर्षों से लेक में अधिक रहा है। बरसात के दिनों में फ्लड गेट खोलने पड़ते हैं। पानी अधिक होने से पक्षियों को भोजन ढूूंढने में किल्लत करनी पड़ती है। इसी वजह है कि पक्षी अब दूसरी जगह जाना पसंद करते हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश के पोंग डैम और दूसरी जगहों पर पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में लेक का जलस्तर बहुत नीचे चला गया था। कई हिस्सों में लेक सूख गई थी उस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी चंडीगढ़ आए थे।

बर्ड सेंसेस में सख्या मिली कम

चंडीगढ़ बर्ड क्लब ने पिछले सप्ताह बर्ड सेंसेस के लिए सर्वे किया था। इस दौरान पिछले पांच वर्षों में सबसे कम पक्षी सुखना लेक के आस-पास मिले थे। इस सेंसेस के आंकड़े चौकाने वाले थे। पानी और जमीन पर रहने वाले दोनों तरह के पक्षी कम मिले थे।

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