चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में बदलेगा मिड-डे मील का मेन्यू, बच्चों को परोसा जाएगा दूध, पनीर और अंडा

उल्लेखनीय है कि राइट टू एजुकेशन आरटीई एक्ट के तहत सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहे 14 साल के स्टूडेंट्स को दोपहर में मिड डे मील दिया जाता है। देश के हर राज्य का मिड डे मील का मेन्यू अलग-अलग हाेता है।

Ankesh ThakurSat, 23 Oct 2021 09:40 AM (IST)
अभी शहर के स्कूलों में मिड डे मिल नहीं दिया जा रहा है।

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स के लिए पकाया जाने वाला मिड डे मील मेन्यू बदल जाएगा। शहर के सभी स्कूलों में मिड डे मील में दाल, सब्जी के साथ अब दूध, पनीर और अंडा भी स्टूडेंट्स को दिया जाएगा। यह पौष्टिक आहार स्टूडेंट्स को रोज दिया जाएगा, ताकि बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सके और स्टूडेंट का संपूर्ण विकास हो सके। मिड डे मील का यह नया मेन्यू दिसंबर से लागू होगा।

उल्लेखनीय है कि राइट टू एजुकेशन आरटीई एक्ट के तहत सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहे 14 साल के स्टूडेंट्स को दोपहर में मिड डे मील दिया जाता है। देश के हर राज्य का मिड डे मील का मेन्यू अलग-अलग हाेता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल में परोसे जाने वाले मिड डे मील में स्टूडेंट्स को दाल, सब्जी के साथ परांठा और अन्य खाने की चीजें भी दी जाती हैं। 

प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को मेन्यू में किया शामिल

मिड डे मील प्रोजेक्ट वर्ष 1996 से देश के स्कूलों में चल रहा है। कहीं पर सूखा राशन दिया जाता है तो कई राज्य पका हुआ खाना स्टूडेंट्स को दोपहर के समय स्कूल में खाने को मुहैया कराते हैं। चंडीगढ़ के सभी सरकारी स्कूलों में भी पका हुआ खाना दिया जाता है। पके हुए खाने को शहर के शिवालिक व्यू होटल सेक्टर-17, चंडीगढ़ होटल एंड मैनेजमेंट सेक्टर-42 और शहर के छह सरकारी स्कूलों में पकाकर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में कुपोषण का स्तर सुधारने के लिए मिड डे मील में पौष्टिक खाना देने की पहल की है। इसके तहत सभी राज्य अलग-अलग मेन्यू तैयार कर रहे हैं।

दूध, अंडा और पनीर देने का प्रोजेक्ट दो साल पुराना

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने मिड डे मील में दूध, अंडा और पनीर देने का प्रोजेक्ट वर्ष 2019 में तैयार किया था। यह प्रोजेक्ट उस समय सोशल वेलफेयर विभाग की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बनाया गया था क्योंकि उस समय सोशल वेलफेयर के सर्वे में पाया गया था कि 10 साल से ज्यादा उम्र के 70 फीसद स्टूडेंट्स कुपोषण का शिकार हैं, जिसका मुख्य कारण पौष्टिक आहार की कमी थी। प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी। कोरोना की वजह से स्कूल बंद हो गए और प्राेजेक्ट को अभी तक शुरू नहीं किया गया। अब एमएचआरडी के निर्देश आने के बाद इस प्रोजेक्ट शुरू करने की कवायद शुरू हुई है।

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