सुरों संग थिरके पैर

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : एक तरफ बांसुरी के सुर तो दूसरी ओर मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति। शास्त्रीय कला की दो विभिन्न विधाएं। जिनकी एक ही मंच पर खूबसूरत प्रस्तुति हुई। ये खूबसूरत संयोग टैगोर थिएटर-18 में शनिवार को हुआ। जहां प्राचीन कला केंद्र-35 द्वारा आयोजित हेमंतोत्सव कार्यक्रम के दूसरे दिन बांसुरी और मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति देखने को मिली। कार्यक्रम का आरंभ बांसुरी वादन की जुगलबंदी से किया गया। इसमें मुंबई से आई बहनें सुचिसमिता और देबोप्रिया ने प्रस्तुति दी। दोनों ने पद्मविभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया से बांसुरी वादन सीखा। दोनों बहनों ने कार्यक्रम की शुरुआत राग बिहाग से की जिसमें अलाप के पश्चात जोड़ पेश किया गया। उपरांत रूपक ताल मध्य लय और तीन ताल द्रुत लय में खूबसूरत बंदिश पेश की गई। इसके पश्चात राग हंसध्वनि में निबद्ध तीन ताल से सजी दो पारंपरिक बंदिशें पेश की गई। कार्यक्रम का समापन राग मिश्र पीलू में निबद्ध खूबसूरत और मीठी धुन से किया। इनके साथ तबले पर सधे हुए तबला वादक अनुतोष दिघरिया ने बखूबी संगत की । पारंपरिक मोहिनीअट्टम की दी प्रस्तुति

दूसरे हिस्से में जयाप्रभा मैनन ने मंच संभाला। उन्होंने नृत्य से शुरुआत की जिसमें उन्होंने पंचतत्वों से बने भगवान शिव की आराधना पेश की । उपरांत शिव पंचाक्षर पेश किया जिसमें शिव की महिमा नृत्य के माध्यम से बताते हुए खूबसूरत नृत्य पेश किया गया। इसके पश्चात वर्षागमन पेश किया जिसमें प्रकृति में मानसून के आगमन से आने वाली खूबसूरती का चित्रण नृत्य के माध्यम से जयाप्रभा मैनन और उनके ग्रुप ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन सप्ताजीव से किया गया जिसमें उन्होंने पारंपरिक मोहिनीअट्टम नृत्य पेश किया एवं जीवन के विभिन्न चक्रों को नृत्य के माध्यम से दर्शाया। जयाप्रभा मैनन के साथ उनके समूह में रेजी अनूप, आरद्रा नायक, रनजीथा राजेश एवं स्मिथा पिल्लई ने साथ दिया।

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