चंडीगढ़ के अस्पतालों में ऑक्सीजन की ना हो कमी, प्रशासन ने तैयार किया बैकअप प्लान

चंडीगढ़ में आक्सीजन की कमी न हो इसको लेकर प्रशासन के अधिकारियों ने बैठक की।

चंडीगढ़ में ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी की मौत ना हो इसके लिए प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को बैठक की है। ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग ने बैठक में विभिन्न अस्पतालों के अधिकारियों को कई जिम्मेदारियां सौंपी गई है।

Vinay KumarSun, 16 May 2021 10:34 AM (IST)

चंडीगढ़, जेएनएन। चंडीगढ़ में ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी की मौत ना हो इसके लिए प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को बैठक की। इस बैठक का नेतृत्व हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग ने किया। मालूम हो कि इस समय देश के कई राज्यों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई में देरी होने के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन अभी से अलर्ट हो गया है। हालांकि चंडीगढ़ के अस्पतालों में अभी ऐसी कोई स्थिति नहीं है। शहर में ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग ने बैठक में विभिन्न अस्पतालों के अधिकारियों को कई जिम्मेदारियां सौंपी गई है। बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अधिकारियों व डॉक्टरों की एक टीम तीनों अस्पताल में जाकर स्टाफ को ऑक्सीजन के सही इस्तेमाल व बर्बादी न करने को लेकर जागरूक करेगी। इसके अलावा टीम आक्सीजन प्लांट, टैंक व अन्य उपकरणों की भी जांच करेगी, ताकि पहले से ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा सकें।

टीम में पीसीएस जगजीत सिंह, डॉ. मनप्रीत सिंह, डॉ. मनजीत सिंह और एसडीओ पवन कुमार शामिल हैं, जो जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 और सेक्टर-48 के अस्पताल का दौरा करेंगे।बैठक में बताया गया कि जीएमसीएच-32 में रोजाना 10 एमटी ऑक्सीजन की खपत हो रही है। यहां पर 130 डी-टाइप सिलिंडर हैं और इनकी संख्या 200 तक करने के लिए सेक्टर-48 अस्पताल से कुछ सिलिंडर यहां लाये जा रहे हैं। इन सिलेंडरों को बैकअप प्लान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। अगर लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई में देरी होगी तो सिलेंडरों और प्लांट से 8 घंटे तक सप्लाई संभव होगी। इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई डिप होने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। सेक्टर-48 अस्पताल में रोजाना 3 एमटी ऑक्सीजन की खपत है। यहां पर 218 डी टाइप सिलेंडर हैं और जीएमसीएच-32 में कुछ सिलेंडर भेजे जाने के बाद यहां पर करीब 150 सिलेंडर बचेंगे।

इन सिलेंडरों को बैकअप प्लान के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। अगर लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई में देरी होगी तो सेक्टर-48 अस्पताल में सिलेंडरों और प्लांट से 24 घंटे तक सप्लाई संभव होगी। इसके अलावा ऑक्सीजन सप्लाई डिप होने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। जीएमएसएच-16 में रोजाना 3 एमटी ऑक्सीजन की खपत है। यहां पर 100 के करीब डी टाइप सिलिंडर हैं, क्योंकि 60 सिलेंडरों हाल ही में शुरु किए गए आर्मी अस्पताल में भेजे गए हैं। इन सिलेंडरों को बैकअप प्लान के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। अगर लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई में देरी होगी तो इन सिलेंडरों और प्लांट से 8 घंटे तक सप्लाई संभव होगी। मालूम हो कि प्रशासक वी पी सिंह बदनोर ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी ना हो इसी को लेकर शनिवार को प्रशासन के अधिकारियों ने बैठक की है।

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