जानें पंजाब की नई कैबिनेट में कैप्‍टन सरकार के मंत्रियों की री-एंट्री व छुट्टी के क्‍या रहे कारण

Punjab New Cabinet पंजाब की नई कैबिनेट में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार के आठ मंत्रियों की री-एंट्री हुई है तो पांच पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो गई है। इन मंत्रियों की नई कैबिनेट में वापसी के कई कारण हैं। पांच मंत्रियों को हटाने के भी कई इहम कारण हैं।

Sunil Kumar JhaSat, 25 Sep 2021 06:12 PM (IST)
पंजाब की नई कैबिनेट में शामिल किए गए पुराने मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा और मनप्रीत सिंह बादल। (फाइल फोटो)

चंडीगढ़, राज्‍य ब्‍यूरो। पंजाब की नई कैबिनेट के नए मंत्रियों का एलान कर दिया गया है। मुख्‍यमंंत्री चरणजीत सिंह की कैबिनेट में अब उनके और दो उपमुख्‍यमंत्रियों सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी सहित 18 मंत्री हो गए हैं। इसके साथ ही कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के आठ मंत्री नई कैबिनेट में अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं। कैप्‍टन अमरिंदर के करीबी पांच मंत्रियों का  पत्‍ता कट गया है। इन आठ पुराने मंत्रियों के कैबिनेट में दोबारा एंट्री के कई कारण माने जा रहे हैं। इसी के साथ पांच मंत्रियों का पत्‍ता कटने की भी कई वजहें ह‍ैं।

 आइये जानें इन मंत्रियों की नई कैबिनेट में स्‍थान बनाने के क्‍या कारण रहे। इसी प्रकार किन वजहाें से पांच मंत्रियों की छुट्टी की गई।

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इसलिए बची इनकी मंत्री की कुर्सी -

ब्रह्म मोहिंदरा- हिंदू चेहरा व छह बार के विधायक हैं। वह कैबिनेट में सबसे सीनियर मंत्री होंगे। उनको लंबा राजनीतिक और प्रशासनिक तर्जुबा है। व‍ह हाईकमान के करीबियों में माने जाते हैं। सरकार के संकट मोचक रहे हैं। पहले उनका नाम उपमुख्यमंत्री के लिए भी चला था लेकिन नवजोत सिद्धू इसमें बाधा बने। मनप्रीत बादल- पांच बार के विधायक हैं और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। पूर्व अकाली भाजपा सरकार द्वारा पंजाब पर 31 हजार करोड़ का कर्ज चढ़ाने के बावजूद वित्त विभाग को अच्छे तरीके से चलाया। आर्थिक संकट के बावजूद छठे वेतन आयोग को लागू करना, रिटायरमेंट एज 60 से 58 करना जैसे बड़े फैसले लेकर रहे चर्चा में रहे। तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा- चार बार के विधायकहैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को बदलने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला सीनियर मंत्री रहे। इससे पहले प्रताप सिंह बाजवा को उतारकर कैप्टन अमरिंदर सिंह को पार्टी का प्रधान बनवाया और उनके साथ मिलकर लड़ाई लड़ी। सुखबिंदर सिंह सरकारिया-- ( तीसरी बार के विधायक ) कैप्टन को सीएम पद से बदलने वाली माझा की तिकड़ी के अहम नेता हैं सरकारिया। कैप्टन सरकार में उनके सबसे पावरफुल चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार से उन्होंने ही पंगा लिया था। अरुणा चौधरी- तीसरी बार की विधायक  हैा। अरुणा चौधरी का नाम पहले इसलिए कट गया था क्योंकि वह मुख्यमंत्री की नजदीकी रिश्तेदार भी हैं। लेकिन, देर रात एक बार फिर चन्नी ने उनकी पैरवी की और कहा कि उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है और साथ ही वह माझा की एकमात्र महिला अनुसूचित जाति की नेता हैं। रजिया सुल्ताना तीसरी बार की विधायक हैं और अल्पसंख्यक कोटे से कांग्रेस की एकमात्र विधायक हैं। उनके पति मोहम्मद मुस्तफा इस समय कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू के प्रिंसिपल रणनीतिक सलाहकार हैं जो हाईकमान और प्रदेश कांग्रेस के बीच एक कड़ी हैं। कैप्अन के तख्ता पलट में इनका भी अहम रोल है। विजयइंदर सिंगला - पहली बार विधायक बने हैं और हिंदू चेहरा हैं। कैबिनेट के युवा चेहरे में शामिल हैं और राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड के नेता हैं। वह पहले संगरूर से संसदीय चुनाव भी जीत चुके हैं। इस बार विधायक बनने के बाद उन्हें शिक्षा मंत्री बनने का मौका मिला जहां उनके किए काम की सराहना हो रही है। भारत भूषण आशु पहली बार विधायक बने हैं। हिंदू चेहरा भारत भूषण आशू भी पार्टी के युवा चेहरों में से एक हैं। उनका लुधियाना कांग्रेस में खासा दबदबा होने के कारण पार्टी उनको इग्नोर नहीं कर सकी। दूसरा वह राहुल गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते हैं।

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इस वजह से इनका मंत्री पद

सुंदर श्याम अरोड़ा- हिंदू चेहरा होशियारपुर से विधायक सुंदर श्याम अरोड़ा 2017 में पहली बार विधायक बने । वह विवादों में ही रहे। जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स की 31 एकड़ जमीन को कौडियों के भाव बेचने का उन पर बड़ा आरोप लगाया जिसकी शिकायत लोकपाल से भी की गई है। साधू सिंह धर्मसोत- अनुसूचित चेहरा। नाभा हलके से विधायक साधू सिंह धर्मसोत जो अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं। उन पर एससी स्कॉलरशिप घोटाला भारी पड़ गया। पिछले लंबे समय से कैप्टन उनका बचाव करते नजर आए । घोटाले की जांच के लिए गठित की गई कमेटी ने आठ करोड़ रुपए का घोटाला निकाला लेकिन सरकार ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। बलबीर सिंह सिद्धू- स्वास्थ्य मंत्री तीन बार विधायक बने बलबीर सिंह सिद्धू को भी चलता कर दिया गया है। उनके कार्यकाल में हुए पांच करोड़ रुपये की नशीली गोलियों का घपला, कोरोना के कार्यकाल में गैर स्तरीय पीपीई किट खरीदने के आरोप लगे। गांव बलौंगी की दस एकड़ चार कनाल जमीन 31 सालों के लिए अपने नाम पर अलाट करवाना उनकी बड़ी गलतियां रही हैं। उनके जाने का कारण बनीं। राणा गुरमीत सोढी- कैप्टन अमरिंदर सिंह के अति नजदीकियों में माने जाने वाले राणा गुरमीत सोढी पर अपनी जमीन का दो-दो बार मुआवजा लेने के आरोप लगे। पूर्व कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ के साथ उनका 36 का आंकड़ा आदि कई ऐसे कारण रहे हैं जिनके कारण वह नई कैबिनेट में अपनी जगह बनाने में असफल रहे। गुरप्रीत सिंह कांगड़- रामपुरा फूल से विधायक गुरप्रीत कांगड़ 2017 में तीसरी बार विधायक बने। वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी नेताओं में माने जाते रहे हैं लेकिन जब कैप्टन के खिलाफ बगावत हुई तो वह सिद्धू खेमे में आ गए। कैप्टन ने उनके दामाद को आबकारी विभाग में इंस्पेक्टर भर्ती करवाने का लालच देकर अपने खेमे में कर लिया जिससे सिद्धू खेमा उनसे नाराज हो गया।

इनकी एंट्री रही हैरान करने वाली

राणा गुरजीत - पहले भी कैप्टन सरकार में सिंचाई व बिजली मंत्री रह चुके हैं। लेकिन, अपने पूर्व कर्मचारी के रेत खनन में शामिल होने के कारण इन्हें देना पड़ा था इस्तीफा। कैप्टन के खास माने जाते हैं लेकिन कैप्टन कैबिनेट में नवजोत सिंह सिद्धू की खाली जगह के बावजूद उन्हें मंत्री नहीं बना पाए थे। अब उनकी एंट्री ने सभी को हैरानी में डाल दिया है।

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 कैबिनेट इस प्रकार होगा-

1. चरणजीत सिंह चन्नी - मुख्‍यमंत्री। 2 . सुखजिंदर सिंह रंधावा - उपमुख्‍यमंत्री 3. ओपी सोनी - उपमुख्‍यमंत्री। 4. ब्रह्म मोहिंदरा - कल लेंगे शपथ। 5. मनप्रीत सिंह बादल - कल लेंगे शपथ। 6. तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा - कल लेंगे शपथ। 7 . सुखबिंदर सिंह सरकारिया - कल लेंगे शपथ। 8. अरुणा चौधरी - कल लेंगे शपथ। 9 . रजिया सुल्ताना - कल लेंगे शपथ। 10. विजय इंद्र सिंंगला- कल लेंगे शपथ। 11. भारत भूषण आशू - कल लेंगे शपथ। 12. डा. राजकुमार वेरका- कल लेंगे शपथ। 13 . संगत सिंह गिलजियां - कल लेंगे शपथ। 14. अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग - कल लेंगे शपथ। 15 .परगट सिंह -कल लेंगे शपथ। 16. कुलजीत नागरा- कल लेंगे शपथ। 17. गुरप्रीत कोटली- कल लेंगे शपथ। 18. राणा गुरजीत - कल लेंगे शपथ।

 

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