Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध में सेना की कमान संभालने वाले रि. जनरल वीपी मलिक बोले- बदल चुकी है घाटी की आबोहवा

Kargil Vijay Diwas कारगिल विजय दिवस के इस खास मौके पर युद्ध के समय भारतीय सेना की कमान संभाल रहे रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक ने कुछ यादों को साझा किया है। वह पत्नी के साथ इसी माह घाटी में घूमने गए थे।

Ankesh ThakurMon, 26 Jul 2021 09:39 AM (IST)
रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक और उनकी पत्नी की यह तस्वीर श्रीनगर की डल झील की है।

विकास शर्मा, चंडीगढ़। Kargil Vijay Diwas: 'ऑपरेशन विजय' के 22 साल। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र पर पाकिस्तान को धूल चटाने की खुशी में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इस युद्ध को जीते हुए 22 साल हो गए हैं। सेना ने जिस हौसले व जुनून के साथ पाक सेना को खदेड़कर अपनी जमीन उनके कब्जे से वापस ली थी, उस बहादुरी को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल यह खास दिन मनाया जाता है।

श्रीनगर में आतंकवाद के सबसे मुश्किल दौर में व कारगिल युद्ध के समय भारतीय सेना की कमान संभाल रहे रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक इसी महीने पत्नी रंजना मलिक के साथ श्रीनगर घूमने गए थे। अपनी इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए मलिक ने श्रीनगर की डल लेक से एक फोटो ट्वीटर पर शेयर की। इस फोटो की कैप्शन में उन्होंने खुबसूरत नजारों का जिक्र करने के बजाय टाइगर हिल में मिली जीत का जिक्र किया। मलिक बताते हैं कि इस युद्ध में हमारे जूनियर्स ऑफिसर्स ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बहादुरी की नई मिसाल दी थी। हमारे सैनिकों की शहादत का असर अब घाटी में दिखने लगा है। आज घाटी की हर छोटी-बड़ी सरकारी इमारत पर तिरंगे को फहराते हुए देखकर काफी अच्छा लगता है। 

सेना में भी बढ़ा है आत्मविश्वास 

वीपी मलिक ने बताया कि रिटायर्ड जनरल होने के नाते उनकी इस  यात्रा की मेजबानी भारतीय सेना ने की थी। वह अपनी यात्रा के दौरान श्रीनगर समेत उरी व बारामूला गए।  इस दौरान  सैन्य अफसरों से बातचीत में  उन्होंने महसूस किया कि आर्टिकल - 370 हटाने के बाद सेना का आत्मविश्वास बढ़ा है। सेना को जमीनी स्तर पर काम करने के लिए जो दिक्कतें आती थी, वह काफी कम हुई हैं। हालात  सामान्य करने के लिए बेहद स्मार्ट तरीके से काम किया जा रहा है। कई स्तरों पर एक साथ काम चल रहा है, आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के साथ स्थानीय लोगों से मेलझोल बढ़ाया जा रहा है।  

लोग भी चाहते हैं घाटी में शांति 

वीपी मलिक बताते हैं कि घाटी के लोगों को भी समझ आने लगा है कि हाथों में पत्थर और बंदूक लेकर सेना व सरकार से नहीं लड़ा जा सकता। इससे उनका अपना नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोग अब शांति चाहते हैं।  बच्चे  व युवा पीढ़ी भी स्कूल -कॉलेज में जाकर अपने भविष्य को संवारने की बात करने लगी है। यह भविष्य के लिए अच्छे संकेत है। पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी यह बात जितनी जल्दी समझ आ जाए, उतना ही उसके लिए अच्छा है।

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