कांग्रेस से मिले बार-बार के झटकों से आहत हैं सुनील जाखड़, जानें तीन कारण जिसकी वजह से हैं नाराज

पंजाब कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ को बार-बार पार्टी ने झटका दिया है। बार-बार के झटकों से अब सुनील जाखड़ आहत है। राहुल गांधी से मीटिंग के बावजूद उनकी नाराजगी कम नहीं हुई है। आइए जानते हैं उनकी नाराजगी की प्रमुख वजह...

Kamlesh BhattThu, 02 Dec 2021 06:33 PM (IST)
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ की फाइल फोटो।

कैलाश नाथ, चंडीगढ़। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ की नाराजगी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जाखड़ को मनाने के लिए दो बार बैठक कर चुके हैं। इसके बावजूद परिणाम शून्य ही नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि बुधवार को राहुल गांधी ने जाखड़ को यहां तक कह दिया कि वह हमेशा ही उनके साथ रहे हैं। इसके बावजूद जाखड़ की नाराजगी दूर नहीं हो रही है, जबकि पूर्व प्रदेश प्रधान ने पार्टी के उपमुख्यमंत्री बनने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया था। इसी वजह से कांग्रेस की परेशानी भी बढ़ रही है, क्योंकि उन्हें जाखड़ का कोई विकल्प नहीं मिल पा रहा है।

सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्या वजह है कि शांत रहकर हमेशा ही पार्टी के हक में चलने वाले जाखड़ इतने नाराज हो गए कि राहुल द्वारा बार-बार मनाने के प्रयास करने के बावजूद उनकी नाराजगी दूर नहीं हो रही है। जाखड़ के करीबी सूत्र बताते हैं कि पूर्व प्रदेश प्रधान ने पार्टी द्वारा बार-बार नजरंदाज किए जाने का तो बुरा नहीं माना, लेकिन जब मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम केवल इसलिए कट गया, क्योंकि वह पगड़ीधारी नहीं है। इसके बाद उनका गुस्सा गहरी नाराजगी में बदल गया।

जाखड़ की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जब 40 विधायकों ने उनके हक में राय दी इसके बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। हालांकि जाखड़ को पार्टी ने उन्हें बेंगलूर के दौरे से वापस चंडीगढ़ बुला लिया था, लेकिन अंतिम समय में अंबिका सोनी कांग्रेस हाईकमान यह दबाव बनाने में कामयाब रही कि पंजाब में केवल पगड़ीधारी को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। जिसके बाद उनका पत्ता कट गया। सूत्र बताते हैं कि पार्टी द्वारा एक बार फिर नजरंदाज किए जाने से वह खासे नाराज हो गए।

कई मौकों पर चोट खाते रहे

कांग्रेस ने 2012 में सुनील जाखड़ को नेता प्रतिपक्ष बनाया था, लेकिन 2015 में पार्टी ने उनसे इस्तीफा लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया। हालांकि पार्टी के इस फैसले ने उस समय भी सभी को चौंकाया था। 2017 में कैप्टन अमरिंदर द्वारा मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने के बाद पार्टी ने जाखड़ को प्रदेश प्रधान बनाया था। जब नवजोत सिंह सिद्धू ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत शुरू की तो पार्टी ने जाखड़ का इस्तीफा लेकर सिद्धू को प्रदेश प्रधान की जिम्मेदारी दी।

अहम बात यह थी कि बतौर प्रदेश प्रधान जाखड़ ने दो बार जिला व प्रदेश कमेटियों के नाम फाइनल करके हाईकमान को भेजा था, लेकिन कांग्रेस ने इन कमेटियों पर कभी भी मोहर नहीं लगाई। जाखड़ पार्टी के अकेले ही प्रधान रहे। बतौर प्रधान जाखड़ ने कैप्टन के फैसलों व नीतियों को लेकर जब भी पार्टी को पत्र लिखा हाईकमान ने कभी भी उस पर तवज्जों नहीं दी, लेकिन प्रदेश प्रधान पद से हटाते समय यह संदेश दिया गया जैसे जाखड़ ही सबसे बड़े ‘विलेन’ रहे हों।

वहीं, रही सही कसर मुख्यमंत्री पद के फैसले को लेकर कर दी। सूत्र बताते हैं कि जाखड़ को सबसे ज्यादा बुरा इस बात को लेकर लगा कि पार्टी ने आखिर मुख्यमंत्री पद को लेकर वोटिंग क्यों करवाई। अगर पार्टी ने विधायकों की राय जानी ही थी तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए था। यही कारण है कि बार-बार पार्टी द्वारा जलील किए जाने के कारण जाखड़ नाराज है।

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