बंधुआ मजदूरी से मुक्त लोगों के पुर्नवास की मांग

-हाईकोर्ट ने जारी किए पंजाब और हरियाणा को नोटिस

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ईट-भट्ठों से मुक्त कराए बंधुआ लोगों के पुनर्वास के लिए केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह नोटिस केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में बनाई गई बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना के तहत पीड़ितों को सहायता दिलवाने के लिए दायर याचिका की सुनवाई के बाद दिए। बंधुआ मजदूरी खत्म करवाने के प्रयासों में जुटी स्वयंसेवी संस्था नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडिड लेबर के निर्मल गोराना ने इस याचिका में कहा है कि समय-समय पर पंजाब और हरियाणा के विभिन्न ईट भट्ठों से बड़ी संख्या में बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाया गया है, जो कि उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ या अन्य राज्यों से लाए जाते हैं। एडवोकेट अर्जुन श्योराण की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि ऐसे मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त तो करवाया गया है, लेकिन योजना के तहत उन्हें पुर्नवास के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जा रही। याचिका के अनुसार, योजना के तहत बंधुआ मजदूरी से छूटे व्यक्ति को 20 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया था, लेकिन पंजाब एवं हरियाणा में ऐसा नहीं किया जा रहा। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने प्रतिवादियों से 10 अक्तूबर को जवाब मांग लिया है।

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