हैपेटाइटिस बी और सी है साइलेंट किलर, समय पर जांच जरूरी

हैपेटाइटिस बी और सी एक साइलेंट किलर है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि लोग समय पर इसकी जांच जरूर कराएं।

JagranWed, 28 Jul 2021 09:41 PM (IST)
हैपेटाइटिस बी और सी है साइलेंट किलर, समय पर जांच जरूरी

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : हैपेटाइटिस बी और सी एक साइलेंट किलर है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि लोग समय पर इसकी जांच जरूर कराएं। हैपेटाइटिस एक घातक बीमारी है। समय पर जांच, टीकाकरण और दवा से 95 फीसद तक खत्म किया जा सकता है। यह कहना है पीजीआइ के हेपटोलॉजी विभाग के डा. अजय दुसेजा का। व‌र्ल्ड हैपेटाइटिस डे पर बुधवार को पीजीआइ के हेपटोलॉजी विभाग ने ई-पब्लिक फोरम का आयोजन कराया। ई-पब्लिक फोरम में विभाग के एचओडी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह, डा. मधुमिता प्रेमकुमार, डा. सुनील तनेजा, डा. निपुन वर्मा, डा. अरका दे और डा. सहज राठी प्रोग्राम के स्पीकर रहे। फोरम में 400 से अधिक डॉक्टरों, मेडिकल स्टूडेंट्स और लोगों ने हिस्सा लिया।

10 से 20 फीसद लोगों को बीमारी का पता ही नहीं चलता

डा. अजय दुसेजा ने बताया कि हैपेटाइटिस को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि हैपेटाइटिस बी और सी के अमूमन लक्षण सामने जल्द नहीं आते हैं। ऐसे में मात्र 10 से 20 फीसद लोगों को ही अचानक चेकअप के दौरान पता चल पाता है कि उन्हें हैपेटाइटिस की बीमारी है। 2018 में भारत सरकार ने टीबी व बाकी बीमारियों की तरह हैपेटाइटिस को जड़ से खत्म करने के लिए नेशनल वायरस हैपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया है। इस प्रोग्राम के तहत हैपेटाइटिस के मरीजों को निशुल्क टेस्ट, टीकाकरण, दवा और इलाज मुहैया कराया जाता है। पीजीआइ चंडीगढ़ को इस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत एक मॉडल सेंटर बनाया गया है। बच्चों में टीकाकरण के जरिए हैपेटाइटिस से बचाव संभव

डा. दुसेजा ने बताया कि बच्चों को हैपेटाइटिस से बचाना संभव है। इसके लिए बच्चों के पैदा होते ही हैपेटाइटिस का टीका जरूर लगवाना चाहिए। हैपेटाइटिस के दो इंजेक्शन लगते हैं। इसके बाद हैपेटाइटिस बी का टीका किसी भी उम्र में लगाया जा सकता है। बच्चों को ये टीका पैदा होने पर उसके बाद एक महीने और छह महीने पर लगता है। हैपेटाइटिस सी के लिए कोई वैक्सीन नही है, इसके लिए लोगों को बचाव की जरूरत है। लिवर फेलियर का कारण बन सकता है हैपेटाइटिस

पीजीआइ के हेपटोलॉजी विभाग के एचओडी प्रोफेसर विरेंद्र और डा. सुनील तनेजा ने बताया कि हैपेटाइटिस से लिवर फेलियर भी हो सकता है। हैपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी है। जिसमें लिवर पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। डा. तनेजा ने बताया कि लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसे एक मैटाबॉलिक फैक्टरी भी कहा जाता है, क्योंकि लिवर पर ही पाचन प्रक्रिया, शुगर लेवल और टॉक्सीन को डिटोक्सीफाइ करता है। हैपेटाइटिस ए और ई गंदा पानी पीने और खान-पान की वजह से होता है। हैपेटाइटिस ए के लक्षण 14 से 28 दिन में और ई के लक्षण 14 से 60 दिन में सामने आते हैं।

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