Chandigarh: बच्चों में Mobile की आदत बना रही मानसिक तनाव शिकार, डॉक्टरों ने बताई वजह

लॉकडाउन में बच्चों की निगाहें मोबाइल पर से नहीं हटी। एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि लॉकडाउन में बच्चे हर रोज दो घंटे मोबाइल का इस्तेमाल जरूर करते पाए गए। एक स्टडी में ये सामने आया है कि लॉकडाउन में बच्चों में मोटापा (ओबेसिटी) बढ़ा है।

Ankesh ThakurSun, 26 Sep 2021 11:40 AM (IST)
लॉकडाउन में बच्चों की निगाहें मोबाइल पर से हटी नहीं।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। कोरोना महामारी के कारण लगी पाबंदियां (लॉकडाउन) के कारण जहां हर वर्ग परेशान हुआ था। वहीं, इससे बच्चे भी अछुते नहीं हैं। पीजीआइ चंडीगढ़ के पीडियाट्रिक विभाग के प्रोफेसर अरुण बंसल ने बताया कि लॉकडाउन में बच्चों की निगाहें मोबाइल पर से नहीं हटी। एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि लॉकडाउन में बच्चे हर रोज दो घंटे मोबाइल का इस्तेमाल जरूर करते पाए गए। इसके कारण बच्चों की आंखों की रोशनी और कान में इयरफोन लगाने की वजह से सुनने की क्षमता पर बुरा असर देखने को मिला।

वहीं, बच्चों के वैक्सीनेशन के इंतजार में स्कूल न खोलना पूरी तरह गलत है। स्कूल न खोलने की वजह से घर पर बैठे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों में मानसिक तनाव के अलावा शारीरिक विकास थम गया है। यही कारण है कि एक स्टडी में ये सामने आया है कि लॉकडाउन में बच्चों में मोटापा (ओबेसिटी) बढ़ा है। यह कहना है इंडियन एकेडेमी ऑफ पीडियाट्रिक के प्रेसिंडट डा. पीयूष गुप्ता का। जोकि दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ मेडिकल साइंस में पीडियाट्रिक विभाग के प्रोफेसर एंड हेड भी हैं। यह बात उन्होंने पीजीआइ चंडीगढ़ में आयोजित नार्थ जोन पेडिकॉन-2021 कार्यक्रम में कही।

इस कार्यक्रम में पीजीआइ चंडीगढ़ के अलावा देशभर के सीनियर पीडियाट्रिशियन मौजूद थे। पेडिकॉन कार्यक्रम में शनिवार को 150 स्पीकर और 600 डेलीगेट्स मौजूद रहे। जहां बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में मार्डन साइंस के योगदान के उपर सेशन आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर सेंट्रल इंडियन एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक के जनरल सेक्रेटरी डॉ. जीवी बासवराज, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. पुरना कुरकुरे, डॉ. संगीता यादव, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. गुंजन बावेजा और डॉ. कन्या मुखोपाध्याय मौजूद  थे।

तीसरी लहर में सिर्फ बच्चे प्रभावित होंगे ये गलत

 

इंडिया एकेडेमी आफ पीडियाट्रिक के प्रेसिडेंट डॉ. पीयूष गुप्ता ने कहा कि जो लोग ये सोच रहे हैं कि तीसरी लहर का सर्वाधिक असर बच्चों पर पड़ेगा। ये तथ्य पूरी तरह गलत है। अगर तीसरी लहर आती है, तो बच्चों के अलावा बाकी वर्ग के लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा। डाॅक्टर अरुण बंसल ने कहा पीजीआइ के सीराे सर्वे में 70 फीसद बच्चों में एंटीबॉडीज पाई गई। इसका मतलब ये बच्चे कोरोना संक्रमित हुए थे, लेकिन ऐसिम्पटेमेटिक होने के कारण बच्चों में संक्रमण का असर कम रहा। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, जिसकी वजह से वे खुद ही रिकवर कर गए।

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