कुराली में 11 करोड़ रुपये से बनाई जा रही पक्की अनाज मंडी, किसानों और आढ़तियों के लिए होगी ये सुविधा

कुराली में 11 करोड़ रुपये से बनाई जा रही पक्की अनाज मंडी।

खरड़ सबडिवीजन के अधीन आने वाले कुराली में पक्की अनाज मंडी का काम तेजी से हो रहा है। पपराली रोड पर लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से 21 एकड़ जमीन में अनाज मंडी बनाई जा रही है। अनाज मंडी में किसानों और आढ़तियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

Ankesh KumarFri, 09 Apr 2021 01:43 PM (IST)

मोहाली/कुराली, जेएनएन। खरड़ सबडिवीजन के अधीन आने वाले कुराली में पक्की अनाज मंडी का काम तेजी से हो रहा है। पपराली रोड पर लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से 21 एकड़ जमीन में अनाज मंडी बनाई जा रही है। पक्की अनाज मंडी में किसानों और आढ़तियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। शहर में पक्की अनाज मंडी न होने के कारण पिछले कई दशकों से किसानों को प्रत्येक सीजन में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

बता दें कि शहर की जो  पुरानी अनाज मंडी है उसमें जगह बहुत कम है। जिस कारण मंडी के बाहर भी अनाज डालना पड़ता है। वहीं शहर की अनाज मंडी में लगभग 55 आढ़ती हैं। जहां धान व गेहूं के सीजन में फसल को बडाली रोड पर कच्ची जमीन में आरजी अनाज मंडी बनाकर फसल डालनी पड़ती है। जिससे कच्ची जगह में अनाज के खराब होने की आशंका बनी रहती है। इस कारण आरजी मंडी में आढ़तियों व किसानों सहित मंडी में काम करने वाले मजदूरों को इससे काफी परेशानी होती हैं। कच्ची मंडी में जहां मिट्टी और धूल आदि कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। बारिश के दिनों में तो यह समस्या ओर भी बढ़ जाती है और मंडी में कई किसानों की फसल पानी में डूब भी जाती है।

इसके अतिरिक्त शहर बडाली रोड पर ट्रालियों और ट्रकों के चलते भी लोगों को काफी परेशानी होती है। पिछले कई दशकों से शहर में पक्की अनाज मंडी बनाने की मांग की जा रही थी और पपराली रोड पर बनाई जा रही आधुनिक अनाज मंडी लगभग नौ महीनों में बनकर तैयार हो जाएगी। मंडी में 90 हजार टन से ज्यादा अनाज की आवक होती है। स्थानीय अनाज मंडी में साल भर में लगभग 90 हजार टन से ज्यादा अनाज की आवक होती है। जिसमें लगभग 50 हजार टन धान और लगभग 40 हजार टन गेहूं की आवक होती है। लेकिन इस फसल की खरीद के लिए शहर की अनाज मंडी में जगह बहुत ही कम है। अनाज की आवक ज्यादा होने और जगह कम होने कारण किसानों और आढ़तियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। अनाज मंडी बनने से किसानों और आढ़तियों की समस्या हमेशा के लिए हल हो जाएगी।

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