चंडीगढ़ शिक्षा विभाग को बेहतर बनाने के लिए आप भी दें सुझाव, ईमेल आइडी dpi-chd@nic.in पर भेजें संदेश

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के पास 114 सरकारी स्कूल हैं जिनमें स्टूडेंट्स के लिए बैठने के लिए बेहतर इमारत होने के साथ सीखने के लिए साइंस मैथ गार्डन से लेकर किचन गार्डन तक तैयार किए गए हैं। वहीं कुछ स्कूलों में खेलने के लिए भी बेहतर मैदान भी हैं।

Ankesh ThakurSun, 25 Jul 2021 01:32 PM (IST)
विभाग ने शहर के लोगों से सुझाव मांगे हैं।

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। चंढीगढ़ शिक्षा विभाग (Chandigarh Education Department) को किस प्रकार से और बेहतर बनाया जा सकता है, इसके लिए शहरवासी सुझाव दे सकते हैं। ऐसे सुझाव शिक्षा विभाग की तरफ से मांगे गए हैं और सुझाव देने के लिए डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन ने खुद की ईमेल आइडी dpi-chd@nic.in भी जारी की है, जिस पर कोई भी सुझाव दे सकता है।

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग को मूलभूत सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला है। उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के पास 114 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें स्टूडेंट्स के लिए बैठने के लिए बेहतर इमारत होने के साथ सीखने के लिए साइंस, मैथ गार्डन से लेकर किचन गार्डन तक तैयार किए गए हैं। वहीं कुछ स्कूलों में खेलने के लिए भी बेहतर मैदान भी हैं।

यह हैं कमियां

विभाग में कमियां भी बहुत हैं। शिक्षा विभाग की खुद की वेबसाइट है लेकिन उसमें स्कूलों की संख्या, विभाग के आला अधिकारियों की स्थिति, एमएचआरडी की तरफ से दी जा रही सुविधाएं, मिड डे मील, फ्री वर्दी, पुस्तकों की जानकारी है, लेकिन आम लोगों की जानकारी और विभाग की पारदर्शिता के लिए कोई जानकारी अपडेट नहीं है। जिससे आम व्यक्ति विभाग की कार्रयप्रणाली को सीधे तौर पर नहीं देख सकता।

भर्ती नियमों का नहीं है उल्लेख

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के खुद के कोई भर्ती नियम नहीं है। कोई भी भर्ती करने के समय कभी पंजाब सर्विस रूल्स तो कभी सेंट्रल रूल्स को उठा लिया जाता है। इसके बाद ज्वाइनिंग के समय आवेदक कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं और भर्ती ठप होकर रह जाती है। इसी प्रकार से खुद के सर्विस रूल्स नहीं होने के चलते प्रमोशन के समय भी टीचर्स को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

आरटीई की नहीं कोई जानकारी

शिक्षा विभाग राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत चलता है। आरटीई में किस प्रकार से स्टूडेंट्स की एडमिशन होती है, किन नियमों का पालन अभिभावकों को करना होता है इसकी भी जानकारी नहीं है।

वरिष्ठता सूची की नहीं जानकारी

वरिष्ठता सूची को लेकर दो मामलों में अदालत में केस चल रहे हैं। वरिष्ठता सूची को कभी भी सार्वजनिक नहीं किया जाता और हर दो से तीन साल बाद उसमें हेर-फेर किया जाता है। वर्ष 2004 में पूनम सूद का वरिष्ठता सूची में नंबर 114 था जबकि वर्ष 2016 के आते-आते वह 14 नंबर तक पहुंच गई और एक जुलाई 2021 को डिप्टी डीईओ के तौर पर ज्वाइन भी कर गई। वहीं वर्ष 2004 की वरिष्ठता सूची में 110 नंबर पर मौजूद रूपिंदर कौर वर्ष 2016 में 39 नंबर पर पहुंची और वह जनवरी 2021 में प्रिंसिपल बन पाई। इसी प्रकार से वरिष्ठता सूची सार्वजनिक नहीं होने से लगातार गड़बड़ी होती रही है।

कांट्रेक्टर की नहीं कोई जानकारी

शिक्षा विभाग में थल्र्ड और फोर्थ क्लास कर्मचारी कांट्रेक्टर के जरिए रखे जाते है। कांट्रेक्टर को हर साल जेम पोर्टल से नियुक्त किया जाता है। किस कर्मचारी का कांट्रेक्टर कौन है इसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर नहीं है। कर्मचारियों के साथ लगातार शोषण होता है लेकिन हैरत की बात यह रहती है कि कर्मचारियों से लेकर विभाग के कई अधिकारियों को कांट्रेक्टर का नाम तक पता नहीं होता। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का एक अधिकारी कांट्रेक्टर रखने की प्रक्रिया में शामिल होता है उसी के पास सारी जानकारी होती है।

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