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पंजाब में सजने लगी मुफ्त चुनावी वायदों की दुकान, कर्ज की चिंता, मुफ्त घोषणाओं का ख्याल

Punjab Assembly Election 2022 पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलोंं की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसके साथ ही राजनीति दलोंकी वायदों की दुकाने सजने लगी हैं। सभी पार्टियां कर्जमाफी से लेकर मुफ्त्त सुविधाएं देने की घोषणा करने की होड़ लग गई है।

Sunil Kumar JhaTue, 23 Nov 2021 11:17 AM (IST)
पंजाब सीएम चरणजीत सिंह चन्‍नी, शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और आप कन्‍वीनर अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। Punjab Assembly Election 2022 एक कहानी है। एक बार एक शेर भेड़ों के झुंड को संबोधित कर रहा था। शेर ने कहा, मेरी सरकार बनी तो मैं सभी भेड़ों को मुफ्त में कंबल दूंगा। जोर-जोर से तालियां बनने लगीं। एक मेमना ने अपनी मां से पूछा। इतने कंबल के लिए तो बहुत सारा ऊन लगेगा। यह ऊन कहां से आएगा। मां ने जवाब दिया, निकाला तो हम ही से जाएगा। 2022 के विधान सभा चुनाव को लेकर यह कहावत फिट बैठती है। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी वायदों की दुकानें सजा ली हैं।   

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मार्च 2022 तक बिजली की कीमत तीन रुपये यूनिट करने की घोषणा की है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के कन्‍वीनर अरविंद केजरीवाल ने 300 यूनिट फ्री बिजली की घोषणा। शिरोमणिअकाली दल ने तो 400 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वायदा कर दिया। केजरीवाल ने फ्री देने के मामले में एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। उन्होंने घोषणा कर दी है कि पंजाब में उनकी सरकार बनने पर 18 वर्ष से ऊपर सभी युवतियों व महिलाओं को 1000 रुपये महीना देंगे।

केजरीवाल के वायदे पर अगर गौर किया जाए तो इसे लागू करना आसान नहीं दिखता। पंजाब में वर्तमान में 99.08 लाख युवतियांंव म हिलाएं 18 वर्ष से ऊपर की है, जबकि अभी फाइनल वोटर सूची चुनाव आयोग को जारी करनी है। अनुमान है कि फाइनल वोटर सूची जारी होने पर यह संख्या एक करोड़ से ऊपर चली जाएगी। अगर सभी महिलाओं को एक हजार रुपये दिए गए तो माह में 1000 करोड़ और वर्ष में 12,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

पंजाब सरकार पर 31 मार्च 2022 तक तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने जा रहा है। वित्तीय स्थिति पर नजर डाली जाए तो पंजाब के पास अपने सारे संसाधनों से 72,042 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। दूसरी ओर,  पंजाब सरकार पर जो कर्ज चढ़ा है, उसके ब्याज की अदायगी, मुलाजिमों के वेतन, सरकार द्वारा दी जा रही पावर सब्सिडी, बुढ़ापा व सामाजिक पेंशन पर 70,000 करोड़ रुपये खर्च होते है।

वर्तमान में पंजाब सरकार 20,315 करोड़ रुपये ब्याज कर की अदायगी कर रही है व इसके चुनावी वर्ष होने के कारण और भी बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में अगर केजरीवाल चुनाव जीत है तो वह अपने 300 यूनिट फ्री बिजली और 1000 रुपये महिलाओं को देने के वायदे को पूरा करेंगे तो प्रत्येक माह 11,200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। अहम बात यह है कि 2017 में कांग्रेस पार्टी ने भी किसानों का कर्जमाफी करने की घोषणा की थी। किसानों के ऊपर 90,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। जबकि कांग्रेस सरकार 4700 करोड़ रुपये का ही कर्ज माफ कर सकी थी।

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