पांच बार स्टेट बॉक्सिंग चैंपियन सुनील रयात ने चंडीगढ़ में संभाला ज्वाइंट स्पोर्ट्स डायरेक्टर का कार्यभार

साल 2019 से यूटी स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट में खाली पड़े ज्वांइट स्पोर्ट्स डायरेक्टर (जेडीएस) के पद पर अब तैनाती कर दी गई है। पांच बार स्टेट बॉक्सिंग चैंपियन रहे सुनील रयात ने इस पद पर कार्यभार संभाल लिया है।

Ankesh ThakurWed, 15 Sep 2021 10:05 AM (IST)
चंडीगढ़ में ज्वाइंट स्पोर्ट्स डायरेक्टर सुनील रयात।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। यूटी स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के ज्वांइट स्पोर्ट्स डायरेक्टर (जेडीएस) के पद पर सुनील रयात ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। यह पद वर्ष 2019 से खाली था। इससे पहले सुनील रयात हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गवर्नमेंट कॉलेज अंब में बतौर अस्सिटेंट प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे थे। सुनील पांच स्टेट बॉक्सिंग चैंपियन और चार बार यूनिवर्सिटी चैंपियन रह चुके हैं।

सुनील रयात ने बताया कि वह खुद खिलाड़ी रहे हैं, ऐसे में उनकी प्राथमिकता यही रहेगी कि खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिलें। उन्होंने बताया कि कोचों की पदोन्नति से संबंधित दिक्कतें, खेल प्रसार, स्पोर्ट्स कांप्लेक्सों में इफ्रांस्ट्रक्चर को मजबूत करना और प्रशासन की तरफ से खेल को प्रमोट करने के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों तक पहुंचाना भी उनकी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वह यूटी स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट से जुड़े हैं, सीखने की दृष्टि से वह इसे एक मौके की तरह देखते हैं।

यह रहेगी सुनील रयात के लिए चुनौती

यूटी स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के पास बेहतर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर है। शहर में मौजूदा समय में एक क्रिकेट स्टेडियम, तीन हॉकी एस्ट्रो टर्फ ग्राउंड, दो ऑल वेदर स्वीमिंग पूल हैं। इसके अलावा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स मनीमाजरा, सेक्टर  -34, सेक्टर -7, सेक्टर -38, सेक्टर -46, सेक्टर -43, सेक्टर -42, सेक्टर -50, सेक्टर -52 और सारंगपुर है। इसके अलावा कई स्कूलों में चलने वाली अकादमियां भी अपनी अलग पहचान रखती हैं। इनमें एसडी स्कूल की बॉक्सिंग अकादमी, एलआइसी क्रिकेट ग्राउंड -26 में चलने वाली लड़कियों की क्रिकेट अकादमी, सेंट स्टीफंस स्कूल में चलने वाली फुटबॉल अकादमी और डीएवी स्कूल -8 की क्रिकेट अकादमी इनमें प्रमुख हैं। गौरतलब है कि खिलाड़ियों को बेहतर स्पोर्टस इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद कोच नहीं होने की वजह से इसका फायदा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा डिपार्टमेंट की कोई स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं होने के चलते भी कई बार किरकिरी हो चुकी है।

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