पर्यावरण संरक्षण के लिए शहर के इस स्कूल ने लिया CNG बस चलाने का निर्णय Chandigarh News

चंडीगढ़, जेएनएन। देश में जहां प्रदूषण को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं शहर में भी प्रदूषण अपने पैर पसार रहा है। पहले और अब के हालात में बहुत फर्क है। पर्यावरण की रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने सीएनजी बस को चलाने का निर्णय लिया है। सीएनजी बस चलाने के लिए आइडिया लंबे समय से दिमाग में चल रहा था, जिसको अब पूरा किया गया है। यह बात सोमवार को ट्राईसिटी की पहली सीएनजी बस को चलाने के अवसर पर सेंट जेवियर सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-44 की प्रिंसिपल डॉ. आइवोरिन ने कहे। इस पहली बस के साथ सेंट जेवियर ट्राईसिटी का पहला स्कूल बन गया है।

सीएनजी बस का मूल्य डीजल बसों से ज्यादा है, लेकिन डीजल बसों के मुकाबले यह 30 प्रतिशत ज्यादा बचत करेगी। एक सीएनजी बस की कीमत करीब 18.5 लाख रुपये है। डीजल बस जहां एक लीटर डीजल में 5.26 किलोमीटर चलती है, वहीं सीएनजी बस एक किलो गैस में 7.5 किमी से लेकर आठ किमी तक चलेगी। इन सबके साथ ही डीजल बस के मुकाबले सीएनजी बस कार्बन मोनो-ओक्साइड का उत्सर्जन 80 प्रतिशत कम करती है।

पर्यावरण को होगा फायदा

शहर के प्राइवेट स्कूलों में 100 के करीब बसें चलती हैं, लेकिन सभी डीजल है। सेंट जेवियर से भी 27 डीजल बसों का संचालन होता है। सीएनजी बस के चलने से यह एक संदेश सभी स्कूल को जाएगा कि वह भी पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दे। अभी तक इस ओर किसी भी स्कूल प्रबंधन का ध्यान नहीं गया है। बसों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसके चलने से पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।

डीजल 10 हजार तो सीएनजी की 40 हजार किमी पर होगी सर्विस

सीएनजी बस को बनाने वाली कंपनी स्वराज माजदा की टेक्निकल टीम ने बताया कि हर 5, 10, 15 हजार किमी पर डीजल बस की सर्विस की जाती है। वहीं सीएनजी बस में ऐसा नहीं होगा। इसकी मेंटेनेंस बहुत कम है। एक सीएनजी बस की करीब 40 हजार किमी पर जाकर सर्विस होगी। उससे पहले केवल बस को चेक ही किया जाएगा। जो बस स्कूल द्वारा खरीदी गई है, वह 42 सीटर है और अत्याधुनकि तकनीक से लैस है।

आग लगने से नहीं होगी जान की हानि

बस को डिजाइन करते समय सुरक्षा को सबसे पहले ध्यान में रखा गया था। बस में खास बात यह है कि इसके टायर और अलॉय विशेष तकनीक से बनाए गए है। उसके अलावा अगर बस में कोई अंदरूनी फाल्ट आता है तो इसमें लगा सिलेंडर काम नहीं करेगा। सबसे बड़ी बात वाहनों में आग लगने का खतरा होता है तो इसमें ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया है जिसके द्वारा अगर बस में आग भी लग जाती है तो सिलेंडर ब्लास्ट नहीं होगा। जब तक आग बढ़ेगी तब तक हम आसानी से बच्चों का रेस्क्यू कर लेंगे।

 

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