किसान कर्ज राहत योजना तैयार करने वाले डॉ. टी हक का कोरोना से निधन

किसानों की कर्ज माफी योजना तैयार करने वाले प्रसिद्ध खेती नीति शास्त्री डॉ. टी हक का गत दिवस कोरोना के चलते निधन हो गया है। डॉ. हक ने ही कर्ज माफी के लिए सबसे पहले सीमांत किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने का सुझाव दिया था।

Kamlesh BhattTue, 04 May 2021 05:42 PM (IST)
प्रसिद्ध खेती नीति शास्त्री डॉ. टी हक की फाइल फोटो।

जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब की किसानों की कर्ज माफी योजना तैयार करने वाले प्रसिद्ध खेती नीति शास्त्री डॉ. टी हक का गत दिवस कोरोना के चलते निधन हो गया है। 2017 में सत्ता में लौटने पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने इस वादे को निभाने की कार्य योजना तैयार करने के लिए उनकी अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया था। चूंकि सरकार के पास कर्ज माफी के लिए संसाधन सीमित थे. इसलिए डॉ. हक ने कर्ज माफी के लिए सबसे पहले सीमांत किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा उन्होंने पांच एकड़ तक के किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने और अन्य किसानों का ब्याज माफ करने की भी सिफारिश की। पंजाब सरकार ने पांच एकड़ तक के किसानों के दो लाख तक के किसानों के कर्ज माफ कर दिए, लेकिन अन्य किसानों का ब्याज माफ करने संबंधी कोई कदम नहीं उठाया।

कमेटी में उनके साथ सचिव के रूप में काम करने वाले खेतीबाड़ी विभाग के कमिश्नर डॉ. बलविंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि मैंने उनके साथ काफी काम किया है। कर्ज माफी योजना तैयार करने से पूर्व जब मैं कृषि विभाग का डायरेक्टर था तब वह खेती एवं लागत मूल्य आयोग के चेयरमैन थे। मैं तभी से उन्हें देखता आ रहा हूं कि वह छोटी किसानी के प्रति कितने चिंतित थे। उनकी आय कैसे बढ़े, हमेशा इसी विषय पर बात करते रहते थे। शायद ऐसा इसलिए था क्योंकि वह खुद एक गरीब परिवार से आए और बहुत मुश्किल भरी राह से गुजरकर उन्होंने अपनी पढ़ाई की। डॉ सिद्धू ने बताया कि उन्होंने एग्रीकल्चर इक्नॉमिक्स में पीएचडी की थी और एग्रीकल्चर इकॉनमिक्स , एग्रीकल्चर डेवलपमेंट और एग्रेरियन रिफाम्र्स में उनकी दक्षता थी।

उन्होंने बताया कि जब 2015 में नीति आयोग ने फार्म प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के इरादे से ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए एक्ट बनाने की सोची तो डॉ हक की अगुवाई में ही कमेटी बनाई गई थी। उनसे कहा गया कि कोई उदार से लैंड लीजिंग एक्ट का ड्राफ्ट तैयार करें जो पूरे देश में सभी राज्यों को मान्य हो। जो उन्होंने किया।

उन्होंने बताया कि इस एक्ट को बनाने के पीछे मंशा यह थी कि जो किसान अपनी जमीनों को ठेके पर देते हैं उनका प्रापर्टी राइट खत्म न हो और ठेके पर जमीन लेने वालों को खेती के लिए कर्ज आदि लेने में सुविधा हो। देश में लगभग बीस फीसदी किसान ठेके पर जमीनें लेकर खेती करते हैं। डॉ. हक की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्य इसे एक्ट को अपनाने के लिए तैयार हुए। डॉ. सिद्धू ने कहा कि डॉ हक का जाने से छोटे किसानों को न पूरा होने वाला घाटा जैसे होगा। 

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