चंडीगढ़ जिला अदालत में सोमवार को नहीं कोई होगा काम, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने लिया फैसला, जानें वजह

सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत में सोमवार को कामकाज पूरी तरह बंद रहेगा। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकील किसी भी केस की सुनवाई या फिर दूसरे मामलों में कोर्ट परिसर नहीं जाएंगे। यह फैसला डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने लिया है।

Ankesh ThakurSat, 25 Sep 2021 12:55 PM (IST)
सेक्टर 43 स्थित चंडीगढ़ जिला अदालत। फाइल फोटो

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। अगर आप किसी किसी काम से या किसी केस की सुनवाई के लिए सेक्टर-43 स्थित चंडीगढ़ जिला अदालत में सोमवार को आ रहे हैं तो आपको परेशानी हो सकती है। सोमवार को जिला अदालत में कामकाज पूरी तरह बंद रहेगा। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकील किसी भी केस की सुनवाई या फिर दूसरे मामलों में कोर्ट परिसर नहीं जाएंगे। 27 सितंबर सोमवार को किसानों के समर्थन में भारत बंद का एलान किया गया है। इस दिन भारत बंद को चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन (डीबीए) ने समर्थन देेेने का फैसला लिया है।

डीबीए अध्यक्ष एडवोकेट भाग सिंह सुहाग ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और हमेशा किसानों के साथ खड़े रहेंगे। किसान नेताओं ने 27 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है और ऐसे में डीबीए उसके समर्थन में सोमवार को वर्क सस्पेंड रखेगी। डीबीए से जुड़ा हर वकील किसानों के समर्थन में खड़ा है। इसके साथ ही किसानों के खिलाफ चल रहे केस को डीबीए निशुल्क लड़ रही है। आने वाले समय में भी हम किसानों के हक में खड़े रहेंगे।

लोगों को होगी परेशानी

जिला अदालत में मामलों की सुनवाई और अन्य कार्यों के लिए रोजाना हजारों लोग आते हैं। ऐसे में सोमवार को कामकाग ठप होने की वजह से इन लोगों को परेशानी हो सकती है। वहीं अदालत में केस भी बड़ी संख्या में लंबित पड़े है और एक दिन कामकाग ठप होने का मतलब सैकड़ों केसों में अगली तारीख दी जाएगी। हालांकि जो वकील डीबीए से संबंधित नहीं है वह कोर्ट परिसर में जा सकते हैं लेकिन संभावना जताई जा रही है कि सोमवार को अदालत में कोई भी वकील एंट्री नहीं करेगा। 

पिछले सप्ताह भी कामकाज रहा था ठप

जिला अदालत में पिछले सप्ताह भी कामकाज ठप रहा था। पंचकूला में पुलिस द्वारा एक वकील के साथ मारपीट करने के विरोध में जिला अदालत में वकीलों ने काम बंद कर दिया था। इस मामले में डीबीए ने अदालत में एक दिन की हड़ताल की थी। एडवोकेट सुहाग ने कहा कि किसान कई महीनों से हड़ताल पर बैठे हुए लेकिन सरकार उनकी एक नहीं सुन रही है।

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