CTU का होगा निजीकरण, किलोमीटर स्कीम के तहत चलेंगी लांग रूट की सभी बसें, विरोध में कर्मचारी

इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के बाद अब चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग भी प्राइवेट हाथों में जा रहा है। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सिटी सर्विस के लिए इलेक्ट्रिक बसें किलोमीटर स्कीम के आधार पर चलाने के बाद अब लांग रूट की बसों को भी इसी आधार पर चलाया जाएगा।

Ankesh ThakurMon, 29 Nov 2021 01:38 PM (IST)
चंडीगढ़ में पहले से ही इलेक्ट्रिक बसों को प्राइवेटाइजेशन के तौर पर चलाया जा रहा है।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के बाद अब चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) भी प्राइवेट हाथों में जा रहा है। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सिटी सर्विस के लिए इलेक्ट्रिक बसें किलोमीटर स्कीम के आधार पर चलाने के बाद अब प्रशासन लांग रूट के लिए भी इसी मॉडल पर बस चलाने जा रहा है। 20 हीटिंग एंड वेंटीलेशन एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) बसों के लिए सोमवार को बिड खुलेगी। जो कंपनी सबसे कम रेट कोट करेगी उसे टेंडर आवंटित किया जाएगा।

इस कंपनी की बस लांग रूट पर चलेंगी। पहले सीटीयू ने अपने स्तर पर ही एचवीएसी बसें खरीदी थी। लेकिन अब खुद न खरीद कर किलोमीटर आधार पर बसें हायर की जाएंगी। सीटीयू वर्कर्स यूनियन और संयुक्त कर्मचारी मोर्चा प्रशासन के इस फैसले का विरोध कर रहा है। सीटीयू वर्कर्स यूनियन के प्रधान एवं स्टेट एक्जीक्यूटिव मेंबर धर्मेंद्र राही ने कहा कि यूटी प्रशासन सीटीयू को प्राइवेटाइजेशन करने जा रहा है। सीटीयू स्टाफ शॉर्टेज के बाद भी मुनाफे में है। डिपार्टमेंट को मुनाफा कमाकर दे रह हैं, फिर भी किलोमीटर स्कीम के आधार पर बसें खरीदी जा रही हैं। इससे प्राइवेट कंपनी को काम सौंपा जा रहा है। जबकि सीटीयू के इंप्लाइज ईमानदारी से काम कर डिपार्टमेंट को लाभांवित कर रहे हैं।

कर्मचारियों ने दी कड़े संघर्ष की चेतावनी

उन्होंने कहा कि विभाग की तरफ से 40 बसों को पहले ही सेंक्शन किया जा चुका है। इनको भी ऐसे ही चलाया जाएगा। अगर प्रशासन ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो बुधवार को ट्रांसपोर्ट डायरेक्टर ऑफिस का घेराव किया जाएगा। ऑफिस घेराव के बाद प्रदर्शन होगा। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा के तहत कई दूसरे संगठन भी उनका साथ दे रहे हैं। वह डिपार्टमेंट को मनमानी नहीं करने देंगे। इन बसों के आने के बाद ऑपरेशन से मेंटेनेंस वर्क तक प्राइवेट कंपनी ही करेगी। सीटीयू वर्कर्स का कोई रोल नहीं रह जाएगा। पहले इलेक्ट्रिक बसें भी इसी तरह से चलाई जा रही हैं।

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