पंजाब में COVID-19 के नए वेरिएंट की पहचान करने के लिए Genome Sequencing सुविधा शुरू, अब जल्द मिलेगी रिपोर्ट

COvid Test पंजाब में कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग फैसिलिटी (COVID-19 Genome Sequencing facility) शुरू हो गई है। इससे कोविड के नए वेरिएंट की पहचान करने में आसानी होगी। लैब पटियाला के सरकारी मेडिकल कालेज में स्थापित की गई है।

Kamlesh BhattThu, 16 Sep 2021 03:50 PM (IST)
पंजाब में कोविड जीनोम सीक्वेंसिंग सुविधा शुरू। सांकेतिक फोटो

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट की पहचान करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा वायरस रिसर्च डायग्नौस्टिक लैब (VRDL) सरकारी मेडिकल कालेज पटियाला में स्थापित की गई है। यह अपनी किस्म की ऐसी पहली कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग फैसिलिटी (COVID-19 Genome Sequencing facility) वाली लैब है। लैब में अब तक लगभग 150 नमूनों की जांच की जा चुकी है। इन नमूनों में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट की पहचान नहीं हुई।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि इससे पहले राज्य सरकार द्वारा कोविड के नए वेरिएंट के संदिग्ध मरीजों के सभी नमूने एनसीडीएस दिल्ली भेजे जाते थे, जहां कोविड के नए वेरिएंट की पुष्टि करने में एक महीने से अधिक समय लग जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी विशेष क्षेत्र में कोविड के नए वेरिएंट का कोई मामला पाया जाता है तो वायरस के फैलाव को और आगे बढ़ने से रोकने के लिए सभी संदिग्ध मरीजों की कांट्रेक्ट ट्रेसिंग और टेस्टिंग करने की तुरंत जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कालेज पटियाला में जीनोम सीक्वेंसिंग फैसीलिटी की उपलब्धता से रिपोर्ट अब 5 से 6 दिनों में मिल रही है।

इस सुविधा की विशेषताओं संबंधी बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लैबोरेटरी को यूके आधारित निर्माता-आक्सफोर्ड नैनोपोर द्वारा विकसित की गई मिनआइओएन एमके 1 सी प्राप्त हुई है। मिनआइओएन एक विशेष संक्षिप्त और पोर्टेबल यूएसबी द्वारा संचालित उपकरण है, जो डीएनए और आरएनए दोनों के रियल-टाईम विश्लेषण के जरिये नतीजों तक तुरंत पहुंचने की सुविधा देता है। जीनोम सीक्वेंसर और सहायक उपकरण एक यूएस आधारित गैर-लाभकारी संगठन, पाथ द्वारा राज्य में चलाए जा रहे कोविड-19 रिस्पांस सपोर्ट के हिस्से के तौर पर दान किए गए हैं।

वीआरडीएल, सरकारी मेडिकल कालेज पटियाला के इंचार्ज द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए सिद्धू ने कहा कि डा. रुपिन्दर बख्शी और उनका स्टाफ पिछले साल मार्च में महामारी के शुरू होने से अब तक राज्य की अथक सेवा कर रहा है। इस लैब को आइसीएमआर द्वारा समूचे भारत में कोविड-19 आरटी पीसीआर टेस्टिंग क्षमता में लैब को सर्वोच्च 5 लैबों में मान्यता दी गई है। लैब की मौजूदा क्षमता को बढ़ाने के लिए, इंचार्ज डा. बख्शी समेत रिसर्च असिस्टेंट्स और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स की एक टीम, बंगलुरू आधारित सीक्वेंसिंग रिसर्च हब, जीनोटाईपिक्स के विशेषज्ञों की टीम द्वारा कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी है। राज्य ने केंद्रीय सीक्वेंसिंग कोन्सोर्टिअम का हिस्सा बनने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। 

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