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मोहाली में सात साल से तलाक के लिए केस लड़ रहा दंपती फिर हुआ एक, जानें मामला

मामले को लेकर जिला लोक अदालत में पहुंचा दंपती और उन्हें समझाते जज आरएस रॉय।

राष्ट्रीय जिला लोक अदालत में एक ऐसा मामला आया जिसमें एक दंपती बीते सात साल से एक दूसरे से अलग होने के लिए केस लड़ रहा था। जब मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचा तो दोनों पति पत्नी ने अलग होने के बजाय एक साथ रहने का फैसला किया।

Ankesh KumarSat, 10 Apr 2021 02:54 PM (IST)

मोहाली, [रोहित कुमार]। अहंकार, सहनशीलता की कमी, रोजगार न होना, आमदन से ज्यादा खर्चे, इंटरनेट में व्यस्त रहना भी पारिवारिक कलह और यहां तक कि परिवार टूटने का कारण बन रहे हैं। यह बात जिला सेशन जज व चेयरमैन जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी आरएस रॉय ने कही। वहीं, इसका एक जीता जागता उदाहरण मोहाली में देखने को मिला है।

शनिवार को लगाई गई राष्ट्रीय जिला लोक अदालत में एक ऐसा ही मामला आया था। दरअसल एक दंपती बीते सात साल से एक दूसरे से अलग होने (तलाक) के लिए केस लड़ रहा था। जब मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचा तो दोनों पति पत्नी ने अलग होने के बजाय एक साथ रहने का फैसला किया।

जिला मोहाली के गांव भागोमाजरा निवासी मंदीप कौर व मंदीप सिंह की शादी 2005 में हुई थी। दंपती के दो बच्चे है। दोनों पति पत्नी पिछले सात साल से एक-दूसरे से अलग होने के लिए केस लड़ रहे थे। लेकिन शनिवार को लोक अदालत में पति पत्नी ने एक साथ रहने का फैसला किया। पत्नी का कहना था कि पति रेगुलर काम नहीं करता, सहनशीलता नहीं है। ईगो दिखाता है। जिससे दोनों में झगड़ा चल रहा था। पति पत्नी ने बताया कि पिछले सात साल से अदालतों के चक्कर काट रहे थे। लेकिन आज एक होने का फैसला किया है। क्योंकि हमारे बच्चे भी नहीं चाहते थे कि हम अलग हों। पति में सुधार आ रहा था। इसलिए साथ रहेंगे।

फैसले के बाद जज आरएस रॉय ने कहा कि पहले संयुक्त परिवार होते थे तो ऐसे झगड़े नहीं होते थे। लेकिन अब पति पत्नी एक दूसरे को समय नहीं दे पाते जोकि झगड़ों का कारण बनते हैं। लोक अदालतें ऐसे मामलों में पुल का काम कर रही हैं। लोक अदालत में हुआ फैसला अंतिम होता है। इससे आगे कोई दलील नहीं होती। किसी रेयर केस में ही आगे सुनवाई होती है।

रॉय ने बताया कि जिले में शनिवार को तीन हजार केस लोक अदालत में सुनवाई के लिए लगे हैं। लेकिन सभी का तो नहीं सात आठ सौ केसों का निपटारा हो जाएगा। लोक अदालत में फैसले के लिए किसी तरह की कोई फीस नहीं लगती। अब लोग भी लोक अदालत को लेकर जागरूक हो रहे हैं। लोक अदालतों को लेकर प्रचार भी किया जा रहा है।

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