चंडीगढ़ में नए स्पीड साइनबोर्ड के लिए मांगे नगर निगम ने प्रशासन से मांगे 1 करोड़ 71 लाख

जालंधर नगर निगम सड़कों पर नए स्पीड साइन बोर्ड और रोड मार्किंग करने से मना कर चुका है। अब प्रशासन को चिट्ठी लिखकर नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य पर करीब 171 लाख रुपये खर्च होंगे।

By Vikas_KumarEdited By: Publish:Mon, 21 Jun 2021 07:58 AM (IST) Updated:Mon, 21 Jun 2021 07:58 AM (IST)
चंडीगढ़ में नए स्पीड साइनबोर्ड के लिए मांगे नगर निगम ने प्रशासन से मांगे 1 करोड़ 71 लाख
चंडीगढ़ में नए स्पीड साइनबोर्ड लगाने के लिए नगर निगम ने प्रशासन से फंड मांगा है।

चंडीगढ़, जेएनएन। नगर निगम सड़कों पर नए स्पीड साइन बोर्ड और रोड मार्किंग करने से मना कर चुका है। अब प्रशासन को चिट्ठी लिखकर नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य पर करीब 171 लाख रुपये खर्च होंगे। प्रशासन अगर चाहता है कि एमसी यह काम करे तो यह फंड उन्हें जारी कर दे। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो प्रशासन से एमसी ने यह कार्य करने का आग्रह किया है। नए स्पीड साइनबोर्ड लगाने के लिए भी प्रशासन से फंड मांगा है।

नगर निगम ने इसके लिए अलग से चिट्ठी प्रशासन के लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट को भेजी है। एमसी ने कहा है कि शहर के काफी रोड उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन पर यह स्पीड साइन बोर्ड और रोड मार्किंग होनी है। इसका अनुमान 1.71 करोड़ रुपये तय किया गया है। इसमें आग्रह किया गया है कि इन काम को यूटी प्रशासन पूरा करे या फिर नगर निगम को यह फंड उपलब्ध कराया जाए, जिससे नगर निगम इन्हें करवा सके। वाहनों के लिए स्पीड लिमिट नई नोटिफिकेशन के बाद बदल गई है। इससे अब पुराने बोर्ड को हटा दिया गया है इनकी जगह नए बोर्ड लगाए जाने हैं।

वाटर टैरिफ नहीं बढ़ने से होगा 90 करोड़ का नुकसान

बढ़े वॉटर टैरिफ पर प्रशासन ने 31 मार्च 2022 तक रोक लगा रखी है। कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों पर अतिरिक्त बोझ अभी नहीं डालने का निर्णय लिया था। लेकिन प्रशासन के इस फैसले ने नगर निगम की मुश्किल बढ़ा दी है। अब नगर निगम कमिश्नर ने प्रशासन के लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट को चिट्ठी लिखकर 90 करोड़ रुपये का फंड मांगा है। प्रिंसिपल सेक्रेटरी को भेजे इस लेटर में बताया गया है कि वॉटर टैरिफ नहीं बढ़ने से नगर निगम को इस दौरान लगभग 90 करोड़ रेवेन्यू का नुकसान होगा।

आवश्यक सेवाओं के ऑपरेशन-मेंटेनेंस पर होने वाला मोटा खर्च नगर निगम को उठाना पड़ता है। इनमें वाटर सप्लाई, सीवरेज, स्टार्म वॉटर ड्रेनेज, रोड, होर्टीकल्चर और स्ट्रीट लाइट इनमें शामिल हैं। इसके अलावा कई डेवलपमेंट वर्क भी नगर निगम करता है। इन सभी कार्यों के लिए करीब 113 करोड़ रुपये का फंड एमसी को चाहिए। 90 करोड़ रेवेन्यू का नुकसान हुआ तो यह सभी कार्य प्रभावित होंगे। एमसी कमिश्नर ने प्रशासन के सामने नगर निगम की माली हालत का जिक्र किया है।

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