चंडीगढ़ के ब्लाइंड इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स की पहल, दृष्टिहीनों के लिए शुरू किया आइ डोनेशन कैंपेन, 115 लोगों ने लिया संकल्प

गवर्नमेंट मेडिकल कालेज सेक्टर-32 से पहुंचे डा. एसके आर्या ने बताया कि दुनिया में इस समय 30 लाख से ज्यादा लोग ऐसे हैंं जो देख नहीं सकते। नेत्रदान से किसी की दुनिया को रंगीन बनाया जा सकता है।

Ankesh ThakurFri, 24 Sep 2021 04:24 PM (IST)
इस अभियान के दौरान 115 से ज्यादा लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया।

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। दृष्टि नहीं लेकिन दृष्टिकोण है। इसी सोच को सच करके दिखाया है ब्लाइंड इंस्टीट्यूट सेक्टर-26 के स्टूडेंट्स और स्टाफ ने। एनएसएस-डे के मौके पर इंस्टीट्यूट की तरफ से आइ डोनेशन कैंपेन की शुरूआत की। जिसमें गवर्नमेंट मेडिकल कालेज सेक्टर-32 से मेडिकल टीम, श्री गुरु गोबिंद सिंह खालसा कालेज सेक्टर-26 ने सहयोग दिया।

इस अभियान के दौरान 115 से ज्यादा लोगों ने आइ डोनेशन के लिए रजिस्टर किया और ज्यादा से ज्यादा लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया। ब्लाइंड इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल जेएस जायरा ने बताया कि हमारे पास भले ही आम इंसान जैसी दृष्टि नहीं है लेकिन हम दुनिया के लिए सोच सकते हैं, भला करने के लिए अपील कर सकते है। 

तीस लाख नेत्रहीन, एक इंसान तीन से चार लोगों की दुनिया को कर सकता है रोशन

 

गवर्नमेंट मेडिकल कालेज सेक्टर-32 से पहुंचे डा. एसके आर्या ने बताया कि दुनिया में इस समय 30 लाख से ज्यादा लोग ऐसे हैंं जो देख नहीं सकते। नेत्रदान से किसी की दुनिया को रंगीन बनाया जा सकता है। नेत्रदान एक ही घर रोशन नहीं होता बल्कि इससे तीन से चार घर भी रोशन हो सकते हैं। यह नेत्रदान करने और नेत्रदान से लाभ पाने वाले इंसान पर निर्भर करता है। डॉ. आर्या ने बताया कि इंसान की आंख की पांच से छह परतें होती है जो कि जरूरत के अनुसार तीन से चार लोगों को भी दी जा सकती है और किसी एक व्यक्ति को भी रोशनी मिल सकती है। 

नेत्रदान महादान- डा. नवजोत कौर

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर श्री गुरु गोबिंद सिंह कालेज सेक्टर-26 की प्रिंसिपल डा. नवजोत कौर ने बताया कि किसी की अंधेरी जिदंगी में रोशनी देना सबसे बड़ा दान होता है। मौत के बाद इंसान नहीं जानता कि उसके साथ आगे क्या होना है। इंसान का अंतिम संस्कार करके या तो आंखों को जलाया जाएगा या फिर उन्हें दफनाकर मिट्टी के हवाले किया जाएगा। यदि इंसान मरने के बाद आंखों का कोर्निया दान कर जाता है तो वह किसी की जिदंगी को रोशन कर सकता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को नेत्रदान करना चाहिए और दूसरों के जीवन को रोशन करने का संकल्प लेना चाहिए। 

 

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