कार छोड़ो, साइकिल अपनाओ... चंडीगढ़ में कलाकार ने वेस्ट मटीरियल से तैयारी की 15 फीट ऊंची साइकिल

चंडीगढ़ के कलाकार विजय पाल की बनाई 20 फीट चौड़ी और 15 फीट ऊंची अनोखी साइकिल जल्द सेक्टर-17-23 और 16 के चौक पर स्थापित की जाएगी। इसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत साइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया है।

Pankaj DwivediWed, 22 Sep 2021 01:27 PM (IST)
अनोखी साइकिल तैयार करने वाले विजय पाल गोयल और महिंदर कौर। जागरण

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दुनिया भर में लोग बुधवार को विश्व कार फ्री डे मना रहे हैं। इसी उद्देश्य से शहर के कलाकार विजय पाल ने अनोखी साइकिल बनाकर लोगों को साइक्लिंग करने को प्रेरित किया है। विजय पाल ने 15 फीट ऊंची अनोखी साइकिल सेक्टर-36 स्थित कला सागर में तैयारी की है। इसे जल्द सेक्टर-17-23 और 16 के चौक पर स्थापित किया जाएगा। वहां यह साइकिल लोगों को रोजमर्रा के काम करने के लिए कार को छोड़कर साइकिल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को प्रेरित करेगी। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि साइकिल बेकार सामान से तैयार की गई है। यह 20 फीट लंबी और 15 फीट ऊंची है। इस साइकिल को देखने के लिए लोगों के कदम खुद ब खुद रुक जाते हैं। 

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में तैयार हुई साइकिल

साइकिल को तैयार करने वाले विजय पाल ने बताया कि शहर में साइकिल संस्कृति को प्रमोट करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट चंडीगढ़ ने इस साइकिल का प्राेजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कई लोगों को चुना गया लेकिन उनके लिए इतनी लंबी और चौड़ी साइकिल बनाना मुश्किल था। जैसे ही यह प्राेजेक्ट उनके पास आया, सबसे बड़ी परेशानी साइकिल के टायरों काे लेकर आई क्योंकि इसकी ऊंचाई 15 फीट की रखनी थी। इसके लिए टायर की ऊंचाई कम से कम 5 से 8 फीट होनी अनिवार्य थी। इस काम में सेवानिवृत अध्यापक महेंद्र कौर ने सहयोग किया। उन्होंने साइकिल के टायर तलाश करके दिए। टायर मिलने के बाद चार महीनों में उन्होंने बेकार सामान से साइकिल कर दी।

प्रशासक करेंगे साइकिल की स्थापना

विजय पाल ने बताया कि साइकिल को जल्द ही शहर के प्रशासक चौक पर स्थापित करेंगे ताकि लोग साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित हो सकें। वे खुद स्वस्थ रहने के साथ-साथ पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त रख सकें।

23 सालों में खड़ा किया कला सागर

कला सागर की स्थापना पर विजय गोयल ने बताया कि वह सेंटरी कांट्रेक्टर हैं। चेनी बेरी का बहुत सारा सामान ऐसा होता है जिस पर एक दरार पड़ने के बाद उसका कोई इस्तेमाल नहीं रहता। उसे रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता। वह जमीन को बंजर बनाता है। उसी सामान को तोड़-जोड़कर कला सागर के अंदर सैकड़ों कलाकृतियों का निर्माण किया गया है। यह कलाकृतियां चंडीगढ़ में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। विजय ने बताया कि कला सागर की शुरुआत सेक्टर-10 स्थित लेजर वैली से हुई थी। वहां पर तीन साल रहने के बाद सेक्टर-36 में ट्रांसफर किया गया। कला सागर के अंदर हर कलाकृति बेकार सामान से बिना रेत और सीमेंट के तैयार की गई है जो कि खुद में अनोखी कला है।

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