चंडीगढ़ की सब्जी मंडी को सेक्टर-39 में शिफ्ट करने में प्रशासन की लापरवाही, 2015 में हुआ था शिलान्यास

सितंबर-2015 में सेक्टर-39 में नई मंडी का शिलान्यास किया गया था। हालांकि इस मंडी को शुरू करने के लिए प्रशासन ने फरवरी 2016 को टारगेट रखा था लेकिन साल अब 2021 भी खत्म होने को है लेकिन सेक्टर-26 की मंडी शिफ्ट नहीं हो पाई है।

Ankesh ThakurSat, 23 Oct 2021 03:41 PM (IST)
सेक्टर-26 मंडी को शिफ्ट करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-39 में नई मंडी बनाई है।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर की सबसे बड़ी सेक्टर-26 सब्जी मंडी बदहाल स्थिति में है। टूटी सड़कें, पार्किंग की व्यवस्था नहीं और गंदगी के ढेर से यहां आने वाले परेशान रहते हैं। पिछले कुछ वर्षों सब्जी मंडी में आने वाले लोगों की संख्या कम हुई है। इस बात का दावा मंडी के दुकानदार कर रहे हैं। सेक्टर-26 मंडी को शिफ्ट करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-39 में नई मंडी बनाई है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी मंडी को शिफ्ट नहीं किया गया। प्रशासन की लापरवाही की वजह से मंडी को शिफ्ट करने का काम अधर में है। सेक्टर-39 मंडी पर करोड़ों रुपये खर्च किया गया है।

सितंबर-2015 में सेक्टर-39 में नई मंडी का शिलान्यास किया गया था। हालांकि इस मंडी को शुरू करने के लिए प्रशासन ने फरवरी 2016 को टारगेट रखा था, लेकिन साल अब 2021 भी खत्म होने को है लेकिन सेक्टर-26 की मंडी शिफ्ट नहीं हो पाई है। 

हाईकोर्ट भी लगा चुका है प्रशासन को फटकार

सेक्टर-39 स्थित नई सब्जी मंडी के निर्माण कार्य को लेकर साल 2017 में हाई कोर्ट ने यूटी प्रशासन को फटकार लगाई थी। उस समय मंडी को बनाने का काम काफी ढीला चल रहा था। इसके बाद प्रशासन ने कार्य में तेजी लाई थी। प्रशासन ने इस मंडी के लिए 100 करोड़ रुपये का नाबार्ड लोन को भी मंजूरी दे दी थी।

75 एकड़ जमीन पर बनी है नई सब्जी मंडी

सेक्टर-39 स्थित नई मंडी 75 एकड़ एरिया में बनाई गई है। यह सेक्टर-26 मंडी से तीन गुना बड़ी है। सेक्टर-26 की मंडी 25 एकड़ में बनी हुई है। सेक्टर-39 की मंडी में 92 दुकानें बनाई गई हैं। इन सभी दुकानों को ऑक्शन के जरिये बेचा जाना है। दुकानदारों के लिए 105 फीट चौड़ा और 850 फीट लंबा प्लेटफॉर्म भी बन कर तैयार कर दिया गया है।

9.4 करोड़ रुपये में तैयार हुआ आक्शन प्लेटफार्म

प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग की ओर से 9500 वर्ग गज एरिया में ऑक्शन प्लेट फार्म को बनाने में 9 करोड़ 4 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर नई मंडी में 27 हजार 885 वर्ग मीटर एरिया में कंक्रीट पेवमेंट का कार्य 9 करोड़ 44 लाख रुपये में पूरा किया गया है।

मंडी निर्माण के लिए सौ करोड़ का लोन हुआ था पास

मंडी निर्माण के लिए बोर्ड ने नाबार्ड से सौ करोड़ का ऋण भी लिया है। फिलहाल मंडी में फल और सब्जियाें के लगभग 270 व्यापारी हैं। बोर्ड ने नई मंडी में लगभग 200 दुकानों का निर्माण करना था और नई दुकानों या चैंबरों को किरायो पर देना था।

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"मंडी को शिफ्ट करने को लेकर बात चल रही है।जल्द ही सेक्टर-26 से मंडी को सेक्टर-39 में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अभी कुछ प्रक्रियाएं बाकी रह गई है। उम्मीद है कि वह जल्दी पूरी हो जाएंगी।

                                                                       -प्रद्युम्न सिंह, ज्वाइंट सेक्रेटरी, मार्केट कमेटी यूटी

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