व्यापारी बोले, अगले वीकेंड लॉकडाउन से पहले प्रशासन करे पुनर्विचार

व्यापारी बोले, अगले वीकेंड लॉकडाउन से पहले प्रशासन करे पुनर्विचार

यूटी प्रशासन की ओर से लगाए गए वीकेंड लॉकडाउन का शहर में मिला-जुला असर रहा।

JagranSun, 18 Apr 2021 06:02 AM (IST)

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : यूटी प्रशासन की ओर से लगाए गए वीकेंड लॉकडाउन का शहर में मिला-जुला असर रहा। सड़कों पर आवाजाही जारी रही, लेकिन इस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर पड़ा है। बाजार बंद होने से व्यापारियों में भारी रोष है। व्यापारियों का कहना है कि पंचकूला और मोहाली के बाजार खुले हुए हैं ऐसे में चंडीगढ़ में लॉकडाउन लगाने का कोई फायदा नहीं। व्यापारियों का यह भी कहना है कि प्रशासन ने उन्हें विश्वास में लेकर लॉकडाउन लगाने का फैसला लेना चाहिए था। रविवार को मनीमाजरा में लगने वाला कार बाजार भी नहीं लगेगा। इसे लेकर डीलर्स में रोष है, क्योंकि बाजार लगाने का नगर निगम शुल्क भी ले चुका है। लॉकडाउन की स्थिति को लेकर जागरण मंच के लिए शहर के व्यापारियों, कार डीलर्स और रेजिडेंट्स ने अपने मुद्दों को सांझा किया।

प्रशासन को वीकेंड पर लगाए गए लॉकडाउन के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। वास्तविक रूप में यह लॉकडाउन केवल बाजारों में ही लगाया गया है जबकि पूरे शहर में गतिविधियां चल रही हैं। अधिकारी केवल खानापूर्ति करने के लिए व्यापारियों को टारगेट कर रहे हैं। क्या कोरोना संक्रमण सिर्फ बाजारों में ही फैलता है। पंचकूला व मोहाली में दुकानें खुली हैं। चंडीगढ़ में लॉकडाउन यहां के दुकानदारों के साथ अन्याय है। बेशक करोना लगातार बढ़ रहा है अगर इस बढ़ती हुई चेन को सही मायने में रोकना है तो संपूर्ण लॉकडाउन लगाया जाए। इस प्रकार आधे अधूरे लॉकडाउन से कोरोना तो खत्म नहीं होगा दुकानदार अवश्य भूखे मर जाएंगे।

- कैलाश चंद जैन, संयोजक, चंडीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल इस समय पहले से बाजारों में खरीदारी कम हो रही है। पहले भी व्यापारियों को नुकसान हुआ है और अब फिर से व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ है। इस समय थोड़ा बहुत काम शनिवार और रविवार को वीकेंड पर ही होता है, लेकिन प्रशासन ने इसे भी बंद कर दिया। प्रशासन को लिए गए फैसले को फिर से विचार करना चाहिए। वीकेंड पर लॉकडाउन लगाने से पहले व्यापारियों को विश्वास में लेना चाहिए था। लेकिन प्रशासन ने एकतरफा व्यापारियों के खिलाफ फैसला ले लिया। शनिवार को बाजार बंद होने से लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

- चरणजीव सिंह, अध्यक्ष, व्यापार मंडल कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शहर के व्यापारियों ने हमेशा ही प्रशासन का साथ दिया है। व्यापारी खुद भी कोरोना वैक्सीन लगवा रहे हैं। वीकेंड में जरूरी वस्तुओं को बेचने वाले दुकानदारों की दुकानें भी बंद करवाई गई। प्रशासन ने खाने पीने के सामान की होम डिलीवरी की मंजूरी दी हुई है। लेकिन, सेक्टर-37 में एक फास्ट फूड वाले को उसकी दुकान खोलने नहीं दी गई। पुलिस कर्मचारी भी कन्फ्यूज हैं कि उन्हें क्या बंद करवाना है और क्या खुला रखना है। लॉकडाउन के लिए जारी की गई गाइडलाइंस स्पष्ट नहीं हैं। व्यापार मंडल के पदाधिकारी जल्द ही इस संबंध में प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

- संजीव चढ्ढा, महासचिव, व्यापार मंडल

शनिवार और रविवार का लॉकडाउन लगाने का फैसला एक दिन पहले लिया गया। इसके लिए शहर के व्यापारी तैयार नहीं थे। ऐसे में लॉकडाउन लगाने का फैसला तुगलकी फरमान जैसा है। लॉकडाउन का असर सिर्फ बाजारों में ही दिख रहा है। प्रशासन को अगले वीकेंड पर लॉकडाउन लगाने से पहले कम से कम शहर की मार्केट एसोसिएशनों के अध्यक्षों से उनकी राय लेनी चाहिए थी। व्यापारियों के प्रतिनिधियों को भी वार रूम की बैठक में शामिल करना चाहिए।

- नरेश महाजन, अध्यक्ष, सेक्टर-23 मार्केट एसोसिएशन लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। उनकी प्रशासन से अपील है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। प्रशासन को मास्क लगाने के लिए और सख्त नियम बनाने चाहिए न कि बाजारों को बंद करना चाहिए। इससे सिर्फ शहर की अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ेगा। सेक्टर-19 के सदर बाजार के दुकानदार पहले से कारोबार में घाटे पर चल रहे हैं। इन छोटे दुकानदारों को अभी तक सरकार से किसी तरह की कोई राहत नहीं मिली है। इन दुकानदारों को प्रॉपर्टी टैक्स और जीएसटी में छूट देनी चाहिए।

- नरिदर सिंह रिकू, अध्यक्ष, सेक्टर-19 सदर बाजार एसोसिएशन होटल और रेस्तरां से जुड़े व्यापारी पहले से नुकसान झेल रहे हैं। पहले जो रात दस बजे से क‌र्फ्यू लगाने का फैसला लिया गया है उसका भी असर होटल और रेस्तरा के कारोबार पर पड़ा है। वीकेंड पर ही शहरवासी रेस्तरां में जाते हैं, लेकिन लॉकडाउन लगाने से पूरा कारोबार ही ठप हो गया है। वहीं कई व्यापारियों को बैंक लोन के अलावा भारी भरकम किराया भी देना होता है। ऐसे में जिस तरह से जरूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने की मंजूरी दी गई है, उसी तरह से होटल और रेस्तरां भी खोलने की मंजूरी दी जानी चाहिए।

- बलजिदर सिंह बिट्टू, संचालक, सेक्टर-43 मेट्रो होटल अभी व्यापारी पिछले साल लगे लॉकडाउन से हुए घाटे से उभरे नहीं हैं और अब फिर से वीकेंड पर लॉकडाउन लगा दिया गया, जबकि सड़कों पर पहले जैसी आवाजाही जारी रही। समझ नहीं आ रहा कि यह कैसा लॉकडाउन है। यह सिर्फ बाजार बंद करने का ही लॉकडाउन दिखाई दे रहा है। अगर लॉकडाउन लगाना ही था तो ट्राईसिटी में लगना चाहिए था। अब पंचकूला और मोहाली खुला है ऐसे में चंडीगढ़ में लॉकडाउन लगाने का क्या औचित्य है।

- भूपेंद्र नारद, सलाहकार, व्यापार मंडल कोरोना से सबसे ज्यादा टैक्सी संचालकों का कारोबार प्रभावित हुआ है। लोगों ने अब दूसरे राज्यों में घूमने जाना बंद कर दिया है। इस समय हाल ये है कि कई टैक्सी संचालकों को एक-एक सप्ताह बाद भी बुकिंग नहीं मिल रही है। लॉकडाउन में टैक्सी के संचालन पर रोक नहीं लगनी चाहिए। टैक्सी संचालक पहले से काफी एहतियात बरत रहे हैं। नगर निगम की ओर से टैक्सी स्टैंड से जो किराया लिया जाता है उसे माफ करना चाहिए।

- रमेश अहूजा, अध्यक्ष, टैक्सी आपरेटर्स एसोसिएशन कोरोना महामारी निश्चित रूप से चीन की देन है। सरकार द्वारा निर्धारित किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना हम सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन कोरोना के दूसरे दौर में इतने भयावह रूप धारण करने के पीछे हम सब भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं। चंडीगढ़ में पर्यटन स्थलों पर अपने परिवार के साथ सप्ताहंत में जाना कोई जरूरी नहीं, लेकिन हम तब तक नहीं रुकते जब तक सरकार इन को बंद नहीं कर देती है। सरकार को लॉकडाउन लगाने के लिए हमने ही मजबूर किया है। दिहाड़ी मजदूरी करने वालों पर लॉकडाउन का सबसे ज्यादा नुकसान सहना पड़ता है। कोरोना के इस तर्क-वितर्क में पड़ने से अच्छा हम नियमों का पालन करें।

- नरेश कोहली, उपाध्यक्ष, हाउसिग इंप्लाइज वेलफेयर सोसायटी केवल शनिवार और रविवार को वीकेंड लॉकडाउन लगाना कोरोना वायरस की रोकथाम का उपाय नहीं है। इससे व्यापारी वर्ग ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी खासी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। लोगों को पांच दिन तो कहीं भी आने-जाने की खुली छूट हो और दो दिन के लिए उन्हें घर में कैद कर दिया जाए तो यह समस्या का कोई समाधान नहीं है। कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग घरों से बाहर निकलते समय निर्धारित गुणवत्ता के मास्क सही तरह से पहनें। इस संबंध में सेक्टरों, गांवों, कॉलोनियों और बाजारों में जाकर चेकिग की जाए और मास्क न पहने वालों के चालान अधिक से अधिक काटे जाएं।

- पंकज गुप्ता, मुख्य प्रवक्ता, फासवेक पिछले साल कोरोनाकाल में नगर निगम की ओर से सभी मार्केट्स को सेनिटाइज किया जाता था, लेकिन यह व्यवस्था अब बंद हो गई है। यह भी संक्रमण बढ़ने का एक कारण हो सकता है। नियमों को लागू करने की बजाय वीकेंड लॉकडाउन लगाना ठीक नहीं है। यह भी देखा गया है कि अब पहले की तरह नियमों को लागू करवाने के लिए प्रशासन सख्ती से कदम नहीं उठा रहा है। दुकानदार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगवा रहे हैं।

- संजय सहगल, महासचिव, आभूषण विक्रेता एसोसिएशन सेक्टर-26 मंडी के व्यापारी पहले से भारी नुकसान में चल रहे हैं। पहले से व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित है। प्रशासन को प्रापर्टी टैक्स में भारी छूट देनी चाहिए। जब कारोबार ही नहीं होगा तो प्रशासन को भी कैसे टैक्स भरेंगे। वीकेंड पर लॉकडाउन लगाना कोई समाधान नहीं है। विशेषज्ञों से राय लेकर प्रशासन को कदम उठाने चाहिए।

- सुनील गुप्ता, सलाहकार, सेक्टर-26 ग्रेन मार्केट एसोसिएशन

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