चंडीगढ़ में कोरोना की मार झेल रहे वेंडर्स, 57 फीसद जमा नहीं करवा पाए लाइसेंस फीस, 28 अप्रैल अंतिम तारीख

चंडीगढ़ में कोरोना की मार झेल रहे वेंडर्स, 57 फीसद जमा नहीं करवा पाए लाइसेंस फीस।

नगर निगम के अनुसार 25 फीसद रजिस्टर्ड वेंडर्स अपने मूल राज्य यूपी और बिहार चले गए हैं। पिछले साल ही कई वेंडर्स चले गए थे जो कि वापस नहीं लौटे हैं। नगर निगम के अनुसार शहर में विभिन्न कैटेगरी में 10 हजार 888 वेंडर्स रजिस्टर्ड हैं।

Ankesh ThakurSun, 18 Apr 2021 10:56 AM (IST)

चंडीगढ़, जेएनएन। शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण बरती जा रही पांबदियों का हर वर्ग पर असर पड़ रहा है। इससे शहर के वेंडर्स भी अछुते नहीं हैं। उनकी हालत इतनी खस्ता है कि 57 फीसद वेंडर्स ने अपनी लाइसेंस फीस भी नहीं भरी है। नगर निगम के अनुसार कई वेंडर्स ने काम भी छोड़ दिया है। इसका कारण यह है कि कोरोना से पहले नगर निगम ने शहर में वेंडिंग जोन बनाए गए थे जहां पर उन्हें शिफ्ट किया गया लेकिन  वहां पर वेंडर्स का काम नहीं चला जिस कारण अब कई वेंडर्स वापस भी बाजारों में लौट आए।

चंडीगढ़ नगर निगम ने परांठे, चाट और सब्जी वालों को अब उनकी पुरानी जगह पर काम करने की भी मंजूरी दे दी है। जिन 57 फीसद डिफाल्टर वेंडर्स ने अपनी लाइसेंस फीस जमा नहीं करवाई है उन्हें 28 अप्रैल तक फीस जुर्माने के साथ जमा करवाने का समय दिया है। जबकि पिछले साल दिसंबर तक लाइसेंस फीस भी आधी कर दी गई थी।

भाजपा पार्षद अनिल दूबे का कहना है कि वेंडर्स से कोरोना के समय लाइसेंस फीस नहीं लेनी चाहिए। पिछली फीस माफ कर देनी चाहिए। उनका कहना है कि एक तरफ तो केंद्र सरकार वेंडर्स को दस हजार रुपये का लोन दे रही है और दूसरी तरह से नगर निगम के अधिकारी वेंडर्स को तंग कर रहे हैं। चंडीगढ़ में इस समय नगर निगम की ओर से दिए जा रहे लोन को जो वेंडर्स ले रहे हैं उन्हें हर माह लाइसेंस फीस पर 500 रुपये की छूट भी दी जा रही है।

नगर निगम के अनुसार 25 फीसद रजिस्टर्ड वेंडर्स अपने मूल राज्य यूपी और बिहार चले गए हैं। पिछले साल ही कई वेंडर्स चले गए थे जो कि वापस नहीं लौटे हैं। नगर निगम के अनुसार इस समय अलग अलग कैटेगरी के 10 हजार 888 वेंडर्स रजिस्टर्ड हैं जिन्हें नगर निगम ने लाइसेंस दिए हुए हैं। जिनमें से 6291 वेंडर्स लाइसेंस फीस जमा न करवाने पर डिफाल्टर की कैटेगरी में आ गए हैं। अब नगर निगम ने वेंडर्स को भी रजिस्टर्ड करना शुरू कर दिया है जो काम तो शहर में करते हैं लेकिन उनके पास आधार कार्ड दूसरे राज्यों का हैं।

नगर निगम ने जब साल 2016 में वेंडर्स को लाइसेंस देने शुरू किए थे तो चंडीगढ़ के आधार कार्ड वाले वेंडर्स को प्राथमिकता दी गई थी। अब नए रजिस्टर्ड वेंडर्स का ड्रा निकालकर उन्हें साइट्स अलाट की जाएगी। इस समय नगर निगम की ओर से हर कैटेगरी के वेंडर्स से अलग अलग फीस चार्ज करता है। 300 से दो हजार रुपये तक की लाइसेंस फीस है। शहर में 46 वेंडिंग जोन की साइट बनाई गई हैं। शहर की सबसे बड़ी वेंडिंग जोन साइट सेक्टर-15 में है जहां पर एक हजार से ज्यादा वेंडर्स एक साथ बैठ सकते हैं। नगर निगम ने अगले दिनों नए सिरे से टाउन वेंडिंग कमेटी का चुनाव करवाने की घोषणा की है। इस कमेटी में पार्षद भी अपना प्रतिनिधि शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

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