39 दिन की अबाबत कौर के अंगदान से मरीज को मिली नई जिंदगी, नन्ही परी के परिवार ने बयां किया दर्द

अबाबत कौर के पिता सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि मैंने और मेरी पत्नी ने महसूस किया कि हमारी बेटी की इतनी छोटी नश्वर यात्रा के पीछे एक उद्देश्य था। वो इस दुनिया में आई थी इतने दर्द में किसी और को जिंदगी देने के लिए।

Ankesh ThakurTue, 30 Nov 2021 08:22 AM (IST)
पीजीआइ ने अंगदान करने वाले बच्चे के परिवार को सम्मानित किया है।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। Organ Donation पंजाब के अमृतसर की मात्र 39 दिन की नन्हीं परी अबाबत कौर ने दुनिया को अलविदा कहने से पहले अंगदान से पीजीआइ चंडीगढ़ में भर्ती मौत से जंग लड़ रहे एक मरीज की जान बचाई। वहीं, इस नन्ही परी के परिवार ने बच्ची के अंगदान का फैसला दिल पर पत्थर रख कर लिया। परिवार के फैसले ने किसी को नया जीवनदान दिया है। दुनिया को अलविदा कर चुकी अबाबत कौर के पिता सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि मैंने और मेरी पत्नी ने महसूस किया कि हमारी बेटी की इतनी छोटी नश्वर यात्रा के पीछे एक उद्देश्य था। वो इस दुनिया में आई थी, इतने दर्द में किसी और को जिंदगी देने के लिए। हो सकता है यह सरबत दा भला का सबसे अच्छा पाठ था, जो गुरबानी हमें सिखाती है। हमने इसे अपनी शांति और सांत्वना के लिए अपनी मासूम बेटी के अंगदान का फैसला किया है। हमें उम्मीद है कि हमारे बच्चे की कहानी उन परिवारों को प्रेरित करेगी जो खुद को एक ही स्थिति में पाते हैं। हम अंगदान पर लोगों को यह महसूस करना चाहते हैं कि मौत चीजों का अंत नहीं है।

वहीं, हरियाणा के यमुनानगर के मनमोहन सिंह के अंगदान से पांच लोगों को नई जिंदगी मिली थी। सोमवार को पीजीआइ और जीएमसीएच-32 ऑर्गेन डोनेशन को लेकर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उक्त लोगों के परिवार इनके परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया गया। जीएमसीएच-32 की डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रोफेसर जसबिंदर कौर ने इन दोनों ऑर्गेन डोनर के परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रोफेसर जसबिंदर कौर ने कहा कि एक परिवार के लिए वो बेहद ही मुश्किल की घड़ी होती है, जब कोई उनका इस दुनिया में नहीं रहता। ऐसे समय में अपने करीबी के अंगदान के जरिए दूसरों की जान बचाने के लिए अंगदान का कदम उठाना बहुत ही हिम्मत वाला फैसला है।

इस दौरान ऑर्गेन डोनेशन पर जागरूकता कार्यक्रम में डॉ विवेक कुमार, डॉ वाईके बत्रा, डॉ सुमन, डॉ सुकन्या मित्रा, डॉ मनीष मोदी, डॉ नारायण यद्दनपुडी, डॉ जीतिंदर मक्कड़, डॉ अमरज्योति हजारिका, डॉ कमल काजल, डॉ गौरी मित्रा, डॉ विकास, डॉ श्याम मीणा, डॉ राज मणि, डॉ आशीष शर्मा, डॉ पी गौतम, डॉ इंदु सेन, डॉ दीपेश बी, डॉ दीपक थापल और प्रोफेसर विपिन कौशल ने अपने  विचार साझा किए।

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