व्यापारी बोल, दुकानदारों से बैठक कर तय किया जाए दुकानें खुलने का समय

व्यापारी बोल, दुकानदारों से बैठक कर तय किया जाए दुकानें खुलने का समय

व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में भीड़ कम करने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है।

JagranThu, 13 May 2021 09:40 PM (IST)

जागरण संवाददाता, बठिडा: कोरोना वायरस के कारण बाजारों में दुकानें खोलने का समय सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक करने के बाद व्यापारियों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में भीड़ कम करने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। दिन भर का रश कुछ समय के लिए सड़कों पर निकलेगा तो जाम तो लगेगा ही। शारीरिक दूरी भी टूटेगी। ऐसे में कोरोना को कैसे हराया जा सकता है। हम सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं, लेकिन सरकारी आदेशों के कारण उनके व्यापार का काफी नुकसान हो रहा है। बाजारों में दुकानें खुलने का समय तय करने को लेकर भी व्यापारियों से कोई सलाह भी नहीं ली गई। दैनिक जागरण की ओर से वीरवार को करवाई गई राउंड टेबल में व्यापारियों ने अपनी इन्हीं परेशानियों पर मंथन किया। सरकार का सिर्फ व्यापारियों पर ही धक्का चलता है: अमित कपूर

व्यापारी हर समय सरकार का साथ देते हैं। अगर अब लाकडाउन लगाया है तो व्यापारी पूरी तरह से साथ हैं। मगर सरकार का यह धक्का सिर्फ व्यापारियों पर ही चलता है। सिर्फ व्यापार को बंद करने से कोरोना के केस कम नहीं होंगे। बाजारों के हालात तो यह हैं कि सिर्फ जरूरी चीजों की दुकानों को छोड़कर और किसी भी दुकान पर ग्राहक नहीं है। वह सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स अदा करते हैं। मगर इसके बाद भी उनको अनदेखा किया जाता है। इस समय उनको दुकानों के बिजली बिल पड़ रहे हैं, जिसमें सरकार को राहत देनी चाहिए। अगर फसलों की बात हो तो किसानों को मुआवजा दे दिया जाता है, लेकिन व्यापारियों को हर बार अनदेखा किया जाता है। यह ठीक नहीं है।

- अमित कपूर, प्रधान, पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल बाजारों में भीड़ कंट्रोल में प्रशासन नाकाम: प्रमोद जैन

व्यापारियों की समस्याएं तो बहुत हैं, मगर कोरोना के नाम पर व्यापारियों को डराया जा रहा है। सरकार का सिर्फ दुकानदारों पर ही कंट्रोल है, जबकि लेबर चौक में कहीं भी कंट्रोल नहीं है। अगर सद्भावना चौक की बात की जाए तो यहां पर इतना ज्यादा ट्रैक है कि पुलिस से भी संभल नहीं रहा है, जबकि क‌र्फ्यू से पहले तो यहां पर अक्सर ही दो तीन मुजाजिम खड़े होते थे। अब वह भी दिखाई नहीं देते। अब बाजारों में ज्यादा लोग आ रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह व्यापारियों को राहत दे ताकि वह अपने बिजनेस को सही तरीक्के से चला सकें। सरकार का जीएसटी, नोटबंदी के अलावा अब कोरोना महामारी में व्यापारी ही साथ दे रहे हैं। सरकार उनके बारे में भी कुछ सोचे।

- प्रमोद जैन, महासचिव, बठिडा व्यापार मंडल भीड़ कम करने के लिए सिर्फ दुकानें ही दिखाई देती हैं: जीवन गोयल

सरकार को सिर्फ बाजारों में व्यापारियों की दुकानें ही दिखाई देती हैं। शहर में और भी कई जगहों पर भीड़ होती है, लेकिन वहां पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता। अगर लेबर चौक की बात की जाए तो वहां पर एक लेबर का मुलाजिम लेने के लिए जाओ तो 20-20 लोग इकट्ठा हो जाते हैं। वहीं बाजार में अगर किसी व्यापारी की दुकान पर 10 लोग भी आ जाएं तो उन पर एक्शन ले लिया जाता है। सरकारों को चाहिए कि वह कोई भी फैसला लेने से पहले व्यापारियों के साथ भी बात करे। हर शहर में व्यापार मंडल बना हुआ है, जिसके हर शहर में मेंबर हैं, लेकिन उनको कभी भी नहीं पूछा जाता। अगर उनकी मुश्किलें सुनेंगे तो ही कोई हल निकल पाएगा।

- जीवन लाल गोयल, प्रधान, बठिडा व्यापार मंडल व्यापारी बिना किसी विरोध के काम करते हैं: दुर्गा प्रसाद

बाजारों में व्यापारी बिना किसी विरोध के काम करते हैं। सरकार हर बार व्यापारियों को निशाना बना लेती है, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। उनके पास तो सिर्फ आदेश आते हैं, जिनको वह सारा दिन इंटरनेट मीडिया पर ढूंढ़ते रहते हैं। अगर यही प्रशासन या सरकार व्यापारियों को मीटिग में बुलाए तो उनको भी सुविधा मिलेगी, वहीं वह अपने सुझाव भी दे सकेंगे। अब तो हालात यह हैं कि चार घंटे बाजार खुलने से कोई काम नहीं होता। सरकार को चाहिए कि वह या तो सारे ही बाजार बंद कर दे या फिर सारा ही खोल दे। इस समय तो उनके पास अपनी दुकानों पर काम करने वाले लड़कों के लिए वेतन भी नहीं निकल रहा है।

- दुर्गा प्रसाद, सलाहकार, बठिडा व्यापार मंडल हफ्ते में पांच दिन तो व्यापारियों को मिलें: विजय गर्ग

सरकार ने शनिवार व रविवार को तो पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। मगर सोमवार से शुक्रवार तक सिर्फ पांच दिन ही दुकानें खोलने की इजाजत है। वह भी सिर्फ चार घंटे। वह चाहते हैं कि सरकार शुक्रवार को भी बाजार बंद कर दे, लेकिन सोमवार से वीरवार तक चार दिन तो उनको पूरे समय के लिए दुकानें खोलने की मंजूरी दे। क्योंकि 10 बजे का समय है तो साढ़े दस बजे तक सारी तैयारी करने में हो जाते हैं, जिसके बाद डेढ़ बजे से फिर दुकानों को बंद करना शुरू किया जाता है। ऐसे में उनके पास सिर्फ तीन घंटे ही बचते हैं। सरकार दुकानदारों के साथ मजाक कर रही है। इतने समय में तो दुकानों के खर्च भी पूरे नहीं हो रहे हैं। व्यापारियों को राहत मिलनी चाहिए।

- विजय गर्ग, सचिव, बठिडा व्यापार मंडल

आठ बजे दुकानें खोलने वालों पर कार्रवाई नहीं: प्रेम सिगला

बाजारों में बेशक दुकानों को खोलने का समय 10 बजे का है, लेकिन कई लोग आठ बजे ही बाजारों में आ जाते हैं। इसके बाद भी उनको कुछ नहीं कहा जाता, क्योंकि उनकी प्रशासन से लेकर सरकार तक पहुंच है। मगर जो शरीफ लोग हैं उन पर सरकार की नजर क्यों पड़ती है? यहां तक कि कालाबाजारी करने वालों के बारे में सारा कुछ जानते हुए भी सरकार व प्रशासन चुप कर जाता है, जबकि व्यापार मंडल ऐसे लोगों का कभी साथ नहीं देगा। अगर प्रशासन व्यापारियों के साथ समय-समय पर मीटिग करे तो उनको इतनी ज्यादा परेशानी कभी भी झेलनी नहीं पड़ेगी। अब तो हालात यह हैं कि अगर सरकार ने व्यापारियों की नहीं सुनी तो उनको दुकानें बंद कर घर पर बैठना पड़ेगा।

- प्रेम सिगला, कोषाध्यक्ष, बठिडा व्यापार मंडल

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