दर्द बांटने के बजाय विजय गोयल का दर्द बढ़ा रहे लोग

सहारा जनसेवा के प्रधान विजय गोयल उदास हैं।

JagranSat, 23 Oct 2021 02:46 AM (IST)
दर्द बांटने के बजाय विजय गोयल का दर्द बढ़ा रहे लोग

गुरप्रेम लहरी बठिडा

सहारा जनसेवा के प्रधान विजय गोयल उदास हैं। भले ही दीवाली नजदीक आने के कारण धोबी बाजार में खूब रोणक है, लेकिन फिर भी वह खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उनकी उदासी और अकेलेपन के दो कारण हैं-पहला उनकी जवान बेटी का चले जाना और दूसरा लोगों द्वारा उनसे बार--बार आकरदर्द बंटाना। हालांकि लोग तो उनके पास दर्द बांटने आते हैं, लेकिन उन लोगों को खुद भी पता नहीं चल पाता कि वे विजय गोयल का दर्द बढ़ा रहे हैं। उनके पास दर्द बांटने आने वाले लोगों में से 70 फीसद ने उनसे बातचीत दौरान कहा, 'जेहड़ी कुड़ी तूं रखी होई सी,ओहदी मौत किवें हो गई?' ये शब्द विजय गोयल के सीने में छेद कर जाते हैं। किसी बाप की जब बेटी जवान उम्र में उनको छोड़ कर चली जाती है तो इसका दर्द एक उस बाप के बिना और कोई नहीं समझ सकता।

असल में विजय गोयल ने 19 साल पहले एचआइवी संक्रमित बच्ची आकांक्षा को अडाप्ट किया था। उस दिन से उन्होंने व उनके पूरे परिवार ने उनको बेटी का प्यार दिया। कभी भी बेटी को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह उनकी अपनी बेटी नहीं। बल्कि विजय गोयल ने घर पर ऐसे बोल रखा था कि आकांक्षा किसी भी चीज की डिमांड करे तो सबसे पहले उसको पूरा करना है। बाकी परिवारिक मेंबरों की मांगे होल्ड भी की जा सकती है, लेकिन आकांक्षा जो मांगे उसको तुरंत हाजिर करना है। पूरा परिवार उसको अपनी बेटी व बहन की तरह ही प्यार करता था, लेकिन अब जब लोग उनसे उक्त बात कहते हैं तो उनको बहुत परेशान करते हैं। उनका कहना है कि आकांक्षा उनकी बेटी थी, लेकिन लोग कहते हैं कि रखी होई सी। वह हमारी प्यारी बेटी थी। उसके चले जाने से पूरा परिवार गमगीन है। अंतिम दिनों में उसकी तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी थी। उसका वह दर्द आज भी हमारी आंखों के सामने हैं। साल 2002 में आकांक्षा को लिया था गोद

साल 2002 की बात है। सहारा जन सेवा को सूचना मिली कि बठिडा के दीप सिंह नगर में एक बेसहारा महिला बेहोश पड़ी है। वह वहां पर गए तो वहां पर उनकी छोटी सी बेटी भी थी। वह बेटी व महिला को अस्पताल में लेकर आए। इलाज शुरू कराया तो टेस्ट से पता चला कि उक्त महिला एचआइवी संक्रमित है। बाद में बेटी का टेस्ट कराया तो वह भी संक्रमित पाई गई। इलाज के बावजूद महिला दम तोड़ गई और उस बेसहारा महिला की बेसहारा बेटी को प्रशासन ने संगरूर के अनाथ आश्रम में छोड़ने का बोल दिया। वह बेटी को उठा कर संगरूर रवाना होने ही वाले थे कि उनकी अंतर आत्मा ने उनको आवाज दी और वह उस बेसहारा बेटी को अपने घर ले आए और उसको अपनी बेटी बना लिया, लेकिन गत 14 अक्टूबर को वह गोयल परिवार को छोड़ कर चली गई।

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