डीटीएच चैनलों की फीस के विरोध में उतरे निजी स्कूल

डीटीएच चैनलों की फीस के विरोध में उतरे निजी स्कूल

लाकडाउन के दौरान बचों को पढ़ाई करवाने वाले डीटीएच चैनलों की फीस अब निजी व सहायता प्राप्त स्कूलों को भरनी होगी। इस बाबत शिक्षा विभाग द्वारा जिले के ऐसे स्कूलों को एक पत्र जारी कर डीटीएच चैनलों की बनती फीस जमा करवाने के आदेश दिए हैं।

Publish Date:Sun, 17 Jan 2021 03:50 PM (IST) Author: Jagran

ज्योति बबेरवाल, बठिडा : लाकडाउन के दौरान बच्चों को पढ़ाई करवाने वाले डीटीएच चैनलों की फीस अब निजी व सहायता प्राप्त स्कूलों को भरनी होगी। इस बाबत शिक्षा विभाग द्वारा जिले के ऐसे स्कूलों को एक पत्र जारी कर डीटीएच चैनलों की बनती फीस जमा करवाने के आदेश दिए हैं। विभाग की तरफ से जारी आदेशों में कहा है कि जिन स्कूलों ने भी डीटीएच चैनलों के जरिए अपने विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाई है, उन सभी स्कूलों को 14 हजार 400 रुपये की फीस चैनलों को भरनी होगी।

विभाग ने सभी स्कूलों को उक्त रकम जल्द से जल्द जमा करवाने के लिए बोला है। वहीं दूसरी तरफ से शिक्षा विभाग के इस फैसले का प्राइवेट स्कूलों ने विरोध जताता है। उनका कहना है कि जब शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों की फीस माफ कर सकता है, तो निजी स्कूलों के क्यों नहीं। लाकडाउन के दौरान डीटूएच चैनलों के जरिए सरकारी व निजी स्कूलों के बच्चों को अध्यापकों द्वारा पढ़ाई करवाई जाती थी। इस दौरान सभी बच्चे घर पर ही पढ़ाई करते थे। शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के बच्चों की फीस माफ कर दी, लेकिन निजी स्कूलों यह कहा गया है कि हर स्कूल द्वारा 14 हजार 400 रुपये चैनलों की वार्षिक फीस जमा करवाई जाए। वहीं दूसरी तरफ एफिलिएटेड व निजी स्कूलों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। इस संबंध में निजी स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा इसकी कोई जानकारी हमें नहीं दी गई। अचानक से फीस भरने के लिए कहा जा रहा है। हमें लाकडाउन में नहीं दी कोई जानकारी

शिक्षा विभाग द्वारा डीटीएच चैनलों की फीस भरने के बारे में कभी कुछ नहीं कहा गया। सभी एफिलिएटेड व निजी स्कूलों को इसकी जानकारी भी नहीं दी थी। उस समय सिर्फ विद्यार्थियों की पढ़ाई ही करवाई जा रही थी, लेकिन अब अचानक से फीस भरने के आदेश दे दिए गए हैं। निजी व एफिलिएटेड स्कूलों में तो बच्चों की फीस भी नहीं आ रही है।

रविदर सिंह मान, प्रधान एफिलिएटेड स्कूल एसोसिएशन शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए बराबर है

हमारे स्कूलों के बच्चों को ज्यादातर पढ़ाई हमारे अध्यापकों द्वारा करवाई गई है। इन चैनलों के जरिए हमारे बच्चों नहीं पढ़ाई नहीं की है। अगर जिन बच्चों ने पढ़ाई की भी है, तो निजी स्कूलों के साथ यह सही नहीं किया जा रहा। राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत शिक्षा का विद्यार्थियों का है, भले ही वह बच्चा सरकारी स्कूलों का हो या फिर निजी स्कूल का हो। अगर यह फीस भरने का आदेश नहीं वापस लिया गया तो केस भी किया जाएगा। शिक्षा सभी के लिए बराबर होनी चाहिए।

विनोद खुराणा, प्रधान, प्राइवेट अनएडिड स्कूल एसोसिएशन

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