एनएचएम कर्मियों की हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाई ब्रेक

नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अधीन ठेके पर काम कर रहे मुलाजिमों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया था।

JagranFri, 19 Nov 2021 03:13 AM (IST)
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाई ब्रेक

जासं,बठिडा: नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अधीन ठेके पर काम कर रहे मुलाजिमों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया था। हड़ताल के तीसरे दिन वीरवार को एनएचएम इंप्लाइज यूनियन के सदस्यों ने सिविल अस्पताल में धरना दिया। कर्मचारियों ने मांग की कि राजस्थान, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर नियमों में तबदीली कर नई पालिसी बनाकर कर्मचारियों को रेगुलर किया जाए। उधर, प्रदेश भर के एनएचएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से केंद्र सरकार की स्वास्थ्य संबंधी तमाम स्कीमों का काम बंद हो गया है। न तो कोई सर्वे हो रहा है और न ही कोई रिपोर्टिंग हो रही है। अस्पताल में मरीज काफी परेशान हो रहे हैं।

वीरवार को हड़ताल के चलते कोविड टीकाकरण और सैंपलिग का काम भी प्रभावित हो गया है। इसके साथ बठिडा सिविल अस्पताल में स्थित लैब में डेंगू टेस्ट भी नहीं हो रहे। वीरवार को डेंगू मरीजों को अपना एलाइजा टेस्ट करवाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ी और उन्हें निजी लैब जाना पड़ा। इसके साथ ही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए जच्चा-बच्चा केन्द्रों पर 100 प्रतिशत काम बंद हो गया है। डोर टू डोर स्कीमों से जागरूकता मुहिम ठप कर दी गई है। आंगनबाड़ी सेंटरों में नौनिहालों का चेकअप नहीं हो रहा। सिविल अस्पतालों में होमियोपैथी और आयुष की ओपीडी बंद है।

यूनियन के नेता नरिदर कुमार, अमन सिगला, कृष्ण कुमार, ओमप्रकाश,मनप्रीत कौर, सुनील कुमार आदि ने कहा कि टीबी विभाग, लैपरोसी विभाग और आरसीएच प्रोग्राम के कर्मचारी 20-25 वर्ष से ठेके पर काम कर रहे हैं लेकिन आज तक उनको पक्का नहीं किया गया। विभाग में काम करते डाक्टर, आयुष, सीएचओ, आऊटसोर्स कर्मचारी, कंप्यूटर आपरेटर, इंफारमेशन असिस्टेंट, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर फीमेल, लैब टेक्नीशियन रेगुलर होने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं पर आश्वासन ही मिले।। पंजाब में एनएचएम इंप्लाइज यूनियन के 12000 से अधिक सदस्य हड़ताल पर हैं। कोरोना महामारी के दौरान कर्मचारियों ने अपनी सेहत की परवाह किए बगैर ड्यूटी को तनदेही से निभाया, लेकिन कांग्रेस सरकार उन्हें पक्का नहीं कर रही। उन्होंने मांग की कि मुलाजिमों की सेवाओं को रेगुलर किया जाए। घर-घर दस्तक मुहिम भी नहीं हो सकी शुरू हड़ताल के कारण आने वाले लोगों व मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं दफ्तरी कामकाज बंद होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। सरकार द्वारा जिले में 30 नवंबर तक कोविड टीकाकरण की दोनों डोज 100 प्रतिशत लोगों को लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुहिम घर घर दस्तक शुरू नहीं सका है। इसी तरह अस्पताल की ओपीडी में आने वाले डेंगू संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए, जिसके चलते डेंगू संदिग्ध मरीजों को डेंगू टेस्ट के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ा।

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