नियुक्ति पत्र देने को लेकर आपस में उलझे हलका विधायक व कांग्रेस नेता

गांव चाओके में मृत किसान के स्वजनों को नियुक्ति पत्र सौंपते समय हलका विधायक व वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपिदर सिंह गोरा एडीसी के सामने ही आपस में उलझ पड़े।

JagranSun, 26 Sep 2021 11:20 PM (IST)
नियुक्ति पत्र देने को लेकर आपस में उलझे हलका विधायक व कांग्रेस नेता

जीवन जिदल, रामपुरा फूल : गांव चाओके में मृत किसान के स्वजनों को नियुक्ति पत्र सौंपते समय हलका विधायक व वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपिदर सिंह गोरा एडीसी के सामने ही आपस में उलझ पड़े। दरअसल मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दिल्ली किसान मोर्चे के मृत किसान सुखपाल सिंह के स्वजनों को नियुक्ति पत्र देने रविवार सुबह गांव मंडी कला पहुंचे थे।

मंडी कला में मृतक के परिवार को नियुक्ति पत्र देने के बाद उन्होंने गांव चाओके के मृत किसान जशनप्रीत सिंह के स्वजनों को नियुक्ति पत्र देने चाओके स्थित उनके घर जाना था। इसी बीच रविवार दोपहर चंडीगढ़ में होने वाले मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के लिए उन्हें चाओके का कार्यक्रम रद कर चंडीगढ़ के लिए रवाना होना पड़ा। मुख्यमंत्री के जाने के बाद एडीसी बठिडा परमवीर सिंह मृत जशनप्रीत सिंह के स्वजनों को नियुक्ति पत्र देने के लिए उनके घर पहुंचे। इस दौरान हलका विधायक जगदेव सिंह कमालू व हलका मौड़ से वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपिदर सिंह गोरा भी उनके साथ थे। विधायक कमालू ने जशनप्रीत के माता-पिता को सौंपने के लिए अपनी जेब से नियुक्ति पत्र निकाला तो भूपिदर सिंह गोरा ने उनके हाथ से नियुक्ति पत्र छीन लिया व कहा कि मुख्यमंत्री के जाने के बाद परिवार को सिर्फ जिला प्रशासन का कोई उच्च अधिकारी ही नियुक्ति पत्र सौंप सकता है, जिसके बाद नियुक्ति पत्र एडीसी को थमा दिया।

वहीं कमालू ने कहा कि खुद मुख्यमंत्री चन्नी ने उन्हें मृतक के स्वजनों को नियुक्ति पत्र सौंपने के लिए कहा था व मुख्यमंत्री के आदेश पर ही वह परिवार को पत्र सौंप रहे हैं। इसी बीच दोनों पक्षों में बहस बढ़ते देख एडीसी ने दोनों पक्षों को शांत करवाया व मृतक के स्वजनों को नियुक्ति पत्र सौंपा।

सीएम का कार्यक्रम रद होने से गांव के लोग हुए निराश

दूसरी तरफ रविवार सुबह से ही मुख्यमंत्री चन्नी के आने का इंतजार कर रहे गांव चाओके के लोगों को मुख्यमंत्री का गांव में आने का कार्यक्रम रद होने से काफी निराश होना पड़ा। गांव वासियों ने कहा कि नए मुख्यमंत्री का सुबह से इंतजार कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री गांव में पहुंचकर उनका दुख सुनेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते उन्हें निराशा तो हुई है कितु उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जल्द ही उनके गांव जरूर आएंगे।

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