तीन माह में भरे सिर्फ 10 सैंपल, एक फेल

त्योहारी सीजन में मिठाई में मिलावट का खेल शुरू हो चुका है लेकिन सेहत विभाग बठिडा की खाद्य सुरक्षा टीम अब भी लापरवाह है।

JagranWed, 13 Oct 2021 05:26 AM (IST)
तीन माह में भरे सिर्फ 10 सैंपल, एक फेल

नितिन सिगला,बठिडा

त्योहारी सीजन में मिठाई में मिलावट का खेल शुरू हो चुका है, लेकिन सेहत विभाग बठिडा की खाद्य सुरक्षा टीम अब भी लापरवाह है। हालात यह हैं कि जुलाई से लेकर सितंबर तक तीन महीने में मिठाइयों के महज 10 सैंपल ही भरे। इनमें से एक फेल हुआ है, जबकि सात पास हैं। वहीं दो की रिपोर्ट पेंडिग है। विभाग की इसी लापरवाही का दुकानदार फायदा उठा रहे हैं और धड़ल्ले से मिलावट वाली मिठाई बेच रहे हैं। इतना ही नहीं विभाग इन दिनों मिठाई के कम और खाद्य पदार्थो के सैंपल ज्यादा ले रहा है, जबकि इन दिनों मिठाई की बिक्री ज्यादा होती है।

दो साल पहले इसी सीजन में सेहत विभाग की खाद्य सुरक्षा टीम ने बड़ी संख्या में मिठाइयों की सैंपल लेकर नकली पैठा व मिलावटी मिठाइयों के अलावा नकली खोया, दूध आदि से तैयार की गई मिठाई पकड़ी थी। इस साल ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। मिलावट खोरों व घटिया मिठाई बेच रहे दुकानदारों के खिलाफ कोई अभियान नहीं छेड़ा जा रहा। मिठाइयों में इस्तेमाल हो रहा नकली मावा और पेठा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस साल भी नकली मावा और पेठे का मिठाई बनाने में बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है। त्योहार के सीजन में दूध की कमी पूरी करने के लिए नकली दूध बेचा जा रहा है। वहीं विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि तीन-तीन फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर के अलावा एक जिला फूड सेफ्टी आफिसर होने के बाद भी जिले में तीन माह में महज 10 सैंपल भरे गए।

उधर, डीएचओ डा. ऊषा गोयल का कहना है कि पिछले तीन माह से काफी खाद्य पदार्थो की सैपलिग की गई है। इसमें मिठाइयों के सैंपल भी शामिल हैं। शहर की सभी बड़ी मिठाइयों की दुकानों की चेकिग की गई है। उनका ज्यादा फोकस लोगों को जागरूक करना है। नौ माह में 405 सैंपल भरने का टारगेट, भरे 323 सेहत विभाग की तरफ से हर माह खाद्य सुरक्षा टीम को कम से कम 45 सैंपल भरने जरूरी किए गए हैं। इसके तहत नौ माह में 405 सैंपल भरने जरूरी थे, लेकिन बठिडा की टीम ने अपने टारगेट के मुकाबले 323 सैंपल ही भरे, जिसमें 20 सैंपल फेल हुए। हैरानी वाली बात यह है कि पिछले साल हर माह 100 सैंपल भरने का टारगेट था, लेकिन इस साल विभाग ने उसमें 55 फीसद कटौती करते हुए महज 45 कर दिए, लेकिन फिर भी टारगेट पूरा नहीं हो रहा, जिससे अधिकारियों की लापरवाही साफ झलकती है।

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