दोनों जिलों के किसान मांग रहे 1812 करोड़ का मुआवजा

बठिडा व मानसा में गुलाबी सुंडी के कारण 3.02 लाख एकड़ में बिजी गई नरमे की फसल बर्बाद हो गई।

JagranThu, 28 Oct 2021 03:49 AM (IST)
दोनों जिलों के किसान मांग रहे 1812 करोड़ का मुआवजा

साहिल गर्ग, बठिडा

बठिडा व मानसा में गुलाबी सुंडी के कारण 3.02 लाख एकड़ में बिजी गई नरमे की फसल बर्बाद हो गई। इसका मुआवजा लेने के लिए किसान यूनियन की ओर से बीते तीन दिन से बठिडा में जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स का पक्के तौर पर घेराव कर धरना लगाया हुआ है। अगर इन दोनों जिलों की बात की जाए तो किसान सरकार से खराब हुई फसल का 1812 करोड़ रुपये मुआवजा लेने के अलावा खेती से जुड़े जिले के मजदूरों के लिए 120 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से किसानों को सूत्रों के अनुसार 362 करोड़ रुपये मुआवजा देने की योजना है।

सूत्रों के अनुसार किसानों को खराब हुई फसल के लिए 12 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की बात की जा रही है, जिसका किसान नेता विरोध कर रहे हैं। किसान प्रति एकड़ के लिए 60 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। बठिडा जिले मे 2,43,600 एकड़ में बिजी नरमा की फसल प्रभावित हुई है। इसके लिए किसान 60 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मांग रहे हैं, जो 1458 करोड़ रुपये बनता है, लेकिन सरकार द्वारा दिए जाने वाले 12 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को 292 करोड़ मिलेंगे। सिका सीधे सीधे तौर पर 1166 करोड़ रुपये का अंतर है। वहीं मानसा में 59 हजार एकड़ में नरमा की खराब हुई फसल के लिए किसान 354 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं तो सरकार की तरफ से उनको 70 करोड़ देने की योजना है। ऐसे में इसका 284 करोड़ रुपये का अंतर है। मजदूरों के लिए भी 30 हजार रुपये प्रति परिवार की जा रही मांग

किसान बठिडा के 250 गांवों के 25 हजार मजदूर परिवारों के लिए 30 हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से 75 करोड़ व मानसा के 150 गांवों के 15 हजार मजदूर परिवारों के लिए 45 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि नरमा की फसल से उनको अच्छी उम्मीद थी कि आमदन होगी, लेकिन गुलाबी सुंडी ने उनकी सारी फसल को खराब कर दिया है। इस कारण कई किसान आत्महत्याएं भी कर चुके हैं, जिनके परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा व एक एक मेंबर को सरकारी नौकरी भी देनी चाहिए। फसल का बीमा भी नहीं करवाते किसान

बठिडा में प्रदर्शन कर रहे किसान यूनियन के नेता सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने बताया कि किसानों को सिर्फ खेती से ही आमदन होती है, लेकिन अब गुलाबी सुंडी ने सारी फसल को खत्म कर दिया है। किसान अपनी फसल को बीमा इसलिए नहीं करवा सकते, क्योंकि उनके पास बीमा की किस्तें भरने के लिए पैसे नहीं होते। अगर सरकार उनकी फसलों का बीमा करे तो कोई भी किसान भूखा नहीं मरेगा। सरकार के आदेश पर ही दिया जाएगा मुआवजा: डीसी

बठिडा के डीसी अरविदपाल सिंह संधू ने बताया किसानों को जो भी मुआवजा दिया जाना है, वह सरकार की तरफ से दिया जाएगा। इसका जैसे ही ऐलान होगा, उनके द्वारा किसानों की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी जाएगी। जबकि जिले में कितनी फसल खराब हुई है, इसके लिए अभी रिपोर्ट फाइनल होना बाकी है।

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