बिजली कर्मियों ने बस स्टैंड पर लगाया जाम, पंजाब सरकार का पुतला फूंका

पंजाब बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने शनिवार को स्थानीय पावर हाउस रोड से बस स्टैंड तक रोष मार्च निकाला

JagranSun, 28 Nov 2021 02:41 AM (IST)
बिजली कर्मियों ने बस स्टैंड पर लगाया जाम, पंजाब सरकार का पुतला फूंका

जासं,बठिडा: 15 नवंबर से हड़ताल पर चल रहे पंजाब बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने शनिवार को स्थानीय पावर हाउस रोड से बस स्टैंड तक रोष मार्च निकाला और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद बस स्टैंड पर चक्का जाम कर दिया। इस मौके पर बिजली कर्मियों ने पंजाब सरकार का पुतला भी फूंका। उनके धरने के चलते सड़क पर वाहनों की कतारें लग गई और ट्रैफिक जाम हो गया।

इस मौके पर प्रवक्ताओं ने कहा कि बोर्ड का प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों को मानने के बजाय लटकाने में लगा हुआ है। कर्मचारियों के संघर्ष को दबाने के लिए पावर ग्रिड पर कम अनुभवी श्रमिकों को लगाया जा रहा है, जो सही से काम नहीं कर पा रहे। आम आदमी परेशान हैं। इसलिए उनकी मांगें जल्द मानी जाएं ताकि वे हड़ताल खत्म कर काम पर लौटें। संयुक्त मंच के नेता ने घोषणा की कि बिजली कर्मचारी अब दो दिसंबर तक हड़ताल पर रहेंगे। उस दिन मुख्यमंत्री के शहर मोरिडा में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर वक्ताओं में भीम सेन, मोहन लाल, दीप चंद, सुरिदर कुमार गोयल, हरबिदर सिंह सेखों, पुनीत गेरा, मक्खन लाल, रेशम सिंह, भूपिदर सिंह संधू, परमजीत सिंह, लक्ष्मण सिंह और हरभगवान सिंह, महिदर कौर, सुखदीप कौर शामिल थे। बस निकालने को लेकर निजी ट्रांसपोर्ट के कर्मियों और प्रदर्शनकारियों में बहस इस बीच आर्बिट बस को बस स्टैंड से बाहर ले जाने पर निजी ट्रांसपोर्टर और बिजली कर्मचारियों में जमकर बहस हुई। बैरिकेड तोड़कर बस निकालने के प्रयास में नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। हालांकि बाद में बिजली कर्मियों के नेताओं ने स्थिति संभाली और बस को निकलने दिया।

इन मांगों के लिए सरकार पर निकाला गुबार

- वर्ष 2016 से छठे वेतन आयोग की संशोधित रिपोर्ट जारी की जाए।

- पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए और परिवीक्षा अवधि समाप्त की जाए।

- कर्मचारियों का बकाया और डीए की किस्त जारी की जाए।

- नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को बिजली इकाई में रियायतें दी जाएं।

- मृत कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाए।

- कच्चे श्रमिकों को स्थाई किया जाए और नई भर्ती शुरू की जाए।

- ठेकेदारी प्रथा को बंद किया जाए।

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