दूसरे राज्यों में लगे लाकडाउन से कूलर इंडस्ट्री प्रभावित

दूसरे राज्यों में लगे लाकडाउन से कूलर इंडस्ट्री प्रभावित

कोरोना वायरस ने गर्मी का सीजन शुरू होने से पहले ही कूलर इंडस्ट्री को ठंडा कर दिया है

JagranSun, 09 May 2021 03:05 PM (IST)

जासं, बठिडा : कोरोना वायरस ने गर्मी का सीजन शुरू होने से पहले ही कूलर इंडस्ट्री को ठंडा कर दिया है। इस समय बठिडा में उत्तर भारत की सबसे बड़ी कूलर इंडस्ट्री बंद पड़ी है। जहां से हर साल देश के विभिन्न राज्यों में डेढ़ लाख कूलरों की सप्लाई होती है। कारण इंडस्ट्री के लिए आक्सीजन नहीं मिल रही, वहीं कूलर बनाने के लिए रा मैटिरियल भी महंगा हो गया है।

अब तो हालात यह हैं कि जिन दिनों में इस कारोबार के जुड़े कारोबारियों के पास बात करने का समय नहीं होता था, वह अब खाली बैठे हैं। हालांकि इन फैक्ट्रियों में काम करने वाली लेबर भी पिछले एक महीने से यहीं पर है। लेकिन इसके बाद भी बठिडा में कूलर बनाने का काम शुरू नहीं हो सका। इस कारण कारोबारी प्रशासन के पास अपनी गुहार भी लगा चुके हैं, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। जबकि बठिडा से हैदराबाद, लखनऊ, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश के एरिया में कूलरों की सप्लाई होती है।

इसके अलावा कूलर इंडस्ट्री रा मैटीरियल से माल मेन्युफैक्चर कर देने पर तय टैक्स अदा करती है, लेकिन अधिकांश उद्योगों में अगर कूलर स्टाक क्लियर नहीं होता तो इंडस्ट्री को दूसरी बार स्टाक पर भी करोड़ों रुपये जीएसटी देना पड़ेगा। वहीं इसे नहीं दे पाने पर नौ फीसद जुर्माना भी अलग देना होगा। ऐसे में माल डंप होने, स्टाक पर जीएसटी व लिमिट पर ब्याज सहित तीन तरफ से मार पड़ने जैसा होगा। वहीं कूलरों की फैक्ट्री में 800 के करीब लेबर के मुलाजिम भी बैठे हैं, जिनका खर्च भी कारोबारियों को ही उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही जिले में ट्रांसफार्मर बनाने वाली इंडस्ट्री पर भी आक्सीजन के कारण ब्रेक लग गई है। 60 करोड़ रुपये का होता है कारोबार

बठिडा में कूलर बनाने के अलावा उसके सामान के करीब 150 कारखाने हैं। इसमें अगर बात करें तो 50 फैक्ट्रियां तो सिर्फ नए कूलर बनाने वाली हैं। जबकि 50 फैक्ट्रियां कूलर के साथ जुड़े सामान को बनाने वाली हैं। यहीं नहीं एक फैक्ट्री से एवरेज एक सीजन में 3 हजार कूलर तैयार होते हैं। जिसका काम जनवरी महीने में शुरू होकर मई के अंत तक चलता है। मगर अब यह काम बंद हो गया। जिस कारण पहले से जो माल तैयार हुआ था, वह अब फैक्ट्रियों में पड़ा है। दूसरी तरफ कारोबारियों के अनुसार एक कूलर की कीमत एवरेज 3 हजार रुपये तक होती है। जिसके चलते बठिडा में ही 60 करोड़ रुपये का कारोबार बंद हो गया। दिल्ली के बाद बठिडा में होता है काम : वरिदर कुमार

बठिडा के इंडस्ट्रियलिस्ट वरिदर कुमार के अनुसार दिल्ली के बाद बठिडा में कूलर बनाने का सबसे ज्यादा काम होता है। इन दिनों में उनको उम्मीद होती है कि काफी अच्छा कारोबार होगा। लेकिन इस कारोबार के बंद हो जाने से वह खाली हो गए हैं। हालांकि लेबर भी यहीं पर है। अगर दूसरे राज्यों में लाकडाउन न लगा होता तो वह कूलरों को भेज देते, जिसके साथ उनका नुकसान भी नहीं होता। जबकि इस समय जो कूलर 4500 रुपये में तैयार होता था, वह अब छह हजार से 6500 रुपये में पड़ रहा है। ऊपर से काम न होने के कारण कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है। सरकार को इसका हल करना चाहिए।

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