यूजर्स चार्जेस से भरा जाएगा सिविल अस्पताल का बकाया 25 लाख रुपये बिजली बिल

सिविल अस्पतालों को अपने यूजर्स चार्जेस से बकाया बिजली बिल भरने के आदेश जारी कर दिए हैं।

JagranFri, 10 Sep 2021 05:30 AM (IST)
यूजर्स चार्जेस से भरा जाएगा सिविल अस्पताल का बकाया 25 लाख रुपये बिजली बिल

जासं,बठिडा: सरकारी दफ्तर पर लगातार बढ़ रहे बिजली बिलों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए पंजाब सरकार ने प्रदेश के सभी सिविल अस्पतालों को अपने यूजर्स चार्जेस से बकाया बिजली बिल भरने के आदेश जारी कर दिए हैं। सेहत विभाग के सचिव की तरफ से जारी पत्र में सिविल सर्जन व एसएमओ को आदेश दिए गए हैं कि अपने अधीन आने वाले सभी सिविल अस्पताल, सब डिवीजन अस्पताल आदि का अब तक बकाया बिजली बिल अपने यूजर्स चार्जेस से भरकर इसकी जानकारी विभाग को भेजें।

बठिडा सिविल अस्पताल पर 25 लाख रुपये बकाया बिजली बिल है, जिसे अस्पताल से हर माह एकत्र होने वाले यूजर्स चार्जेस से भरने की तैयारी विभाग की तरफ से की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ से विभाग की तरफ से जारी पत्र से सेहत विभाग के अधिकारी भी अंसमजस की स्थिति में हैं। पत्र में कहा गया है कि सेहत विभाग अपने यूजर्स चार्जेस का इस्तेमाल बकाया और बिजली बिल चुकाने के लिए करे। ऐसे में यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है कि यह यूजर्स चार्जेस एक बार बकाया बिल चुकाने के लिए इस्तेमाल करने हैं या फिर हर माह बिजली बिल भरने के लिए। अगर यह सेहत विभाग हर माह बिजली बिल अपने यूजर्स चार्जेस से भरना शुरू करता है तो सिविल अस्पताल प्रशासन के लिए एक नई मुसबित खड़ी हो जाएगी।

सिविल अस्पताल बठिडा के सीनियर मेडिकल आफिसर डा. मनिदरजीत सिंह का कहना है कि सरकार के आदेशों के अनुसार सिविल अस्पताल का बकाया 25 लाख रुपये बिजली बिल यूजर्स चार्जेस से भरा जाएगा। यह सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल होगा। विभाग की तरफ से जारी पत्र में सिर्फ बकाया ही बिल भरने के आदेश दिए गए हैं, न कि हर माह बिजली बिल भरने के लिए। यूजर्स चार्जेस से ही होता है ठेके पर भर्ती कर्मियों के वेतन व अन्य खर्चो का भुगतान सिविल अस्पताल बठिडा को हर माह 45 से 50 लाख रुपये की आमदनी यूजर्स चार्जेस के रूप में होती है, जिसमें अस्पताल में ठेके पर भर्ती डाक्टर, मेडिकल स्टाफ के अलावा अन्य कर्मियों को वेतन देने और रूटीन के खर्चें, रिपेयर आदि के खर्चे निकाले जाते हैं। ऐसे में अगर अस्पताल प्रशासन को हरमाह यूजर्स चार्जेस से बिजली बिल भरना पड़े, तो अस्पताल पर आर्थिक तौर पर ओर भी बोझ बढ़ेगा और दूसरे काम भी प्रभावित होंगे। वहीं अस्पताल को प्रशासन को छोटे-मोटे काम करवाने के लिए विभाग या सरकार से फंड की मांग करनी पड़ेगी। इससे काम भी प्रभावित होंगे और सेहत सेवाएं भी।

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