34 एमएम बारिश में डूबे निगम के दावे

नगर निगम ने मानसून से पहले बरसात के पानी से निपटने के पूरे प्रबंध कर लेने के दावे किए थे।

JagranThu, 22 Jul 2021 10:33 PM (IST)
34 एमएम बारिश में डूबे निगम के दावे

जागरण संवाददाता, बठिडा: नगर निगम ने मानसून से पहले बरसात के पानी से निपटने के पूरे प्रबंध कर लेने के दावे किए थे। कहा था कि इस बार लोगों को जलभराव की समस्या नहीं आएगी। निगम के सभी दावे वीरवार सुबह ही 34 एमएम बारिश के पानी में ही डूब गए। हालात ये हुए कि 12 करोड़ रुपये की लागत से डाली गई नई राइजिग मेन और 1.32 करोड़ रुपये की लागत के साथ आलम बस्ती में बनाया गया नया डिस्पोजल भी जलभराव नहीं रोक पाया। शहर की अधिकतर सड़कें जलमग्न हो गई और लोगों के घरों में पानी भर गया।

नई राइजिग मेन का बीती 10 जुलाई को ही वित्तमंत्री ने उद्घाटन किया था। सूत्रों के अनुसार यहां नया पंप चल ही नहीं पाया। पुराने पंपों से ही निकासी हुई। इसी तर आलम बस्ती के नए डिस्पोजल का बीती 18 जुलाई को उद्घाटन किया गया था, लेकिन नया और पुराना दोनों डिस्पोजल भी शाम तक ही पानी निकाल पाए। वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल के ओएसडी सहित अन्य कांग्रेस नेता नगर निगम के अधिकारियों के साथ जल्द पानी की निकासी के लिए एक डिस्पोजल से दूसरे डिस्पोजल तक भागदौड़ करते हुए नजर आए। सुबह की बारिश का पानी दोपहर तीन बजे तक निकला ही था कि शाम को करीब चार बजे फिर से बरसात हो गई। करीब 20 मिनट फिर से जमकर बरसात हुई। घरों में घुसा पानी, लोग बोले-43 साल से यही हालात

बारिश के कारण सिरकी बाजार, पावर हाउस रोड, परस राम नगर, प्रताप नगर, डीसी, एसएसपी व आइजी निवास के पास, भट्टी रोड, अग्रवाल कालोनी, मैहणा चौक, बसंत विहार, शक्ति नगर, वीर कालोनी, नई बस्ती, गणेशा बस्ती, अमरपुरा बस्ती, पुराना थाना, गुरू नानकपुरा सहित अनेक क्षेत्रों में जलभराव हो गया। परसराम नगर के तो घरों तक में भी पानी घुस गया। निचले क्षेत्रों में पानी भरने के बाद प्रशासन की ओर से बैरिकेड लगाकर ट्रैफिक रोकना पड़ा। सिरकी बाजार के दुकानदारों राज कुमार, घनश्याम गर्ग आदि ने कहा कि वे पिछले 43 साल से यही हाल देख रहे हैं।

सरूप सिगला ने वित्तमंत्री के खिलाफ लगाए आरोप पूर्व विधायक व शिअद के वरिष्ठ नेता सरूप चंद सिगला बरसात रुकने के बाद परसराम नगर पहुंचे। पानी के बीच खड़े होकर वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर आरोप लगाए कि चार साल तक उन्होंने इसलिए काम नहीं किया, क्योंकि निगम में विपक्ष की सत्ता थी। अब करोड़ों रुपये अपने लालच के लिए खर्च भी किए, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं निकला। लोगों के घरों में पानी घुसने से लाखों रुपये का नुकसान हो गया। शहर को पानी में डुबोने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभाग कार्रवाई के अलावा पर्चा भी दर्ज होना चाहिए।

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