अटारी सीमा पर आज होगा विश्व की अद्वितीय विजिटर गैलरी का लोकार्पण

जेएनएन, अमृतसर। भारत-पाक सीमा पर ज्वाइंट चेक पोस्ट (जेसीपी) अटारी बॉर्डर पर होने वाली परेड अब सैलानियों के लिए और रोमांचक होने वाली है। परेड स्थल के आसपास बनी गैलरी में न सिर्फ इस परेड स्थल की क्षमता को बढ़ाकर कई गुना कर दिया गया है बल्कि कई नई सुविधाएं भी दी गई हैैं। सीमा सुरक्षा बल के डायरेक्टर जनरल केके शर्मा इसका आज लोकार्पण करेंगे।

यहां से बीएसएफ और पाक रेंजर्स की संयुक्त परेड के साथ दिखेगा पाकिस्तान का भी नजारा

पांच हजार लोगों के बैठने की क्षमता को बढ़ा कर 25 हजार कर दिया गया है। गैलरी का निर्माण 10 मई 2015 को शुरू हुआ था। तब इसकी अनुमानित लागत 17 करोड़ और 26 लाख के करीब थी, जो काम पूरा होने तक बढ़कर करीब 24 करोड़ तक पहुंच गई है। निर्माण 21 माह में मुकम्मल किया जाना था लेकिन इस अत्याधुनिक गैलरी के निर्माण में 41 माह से अधिक का समय लगा।

गौरतलब है कि दो देशों के बॉर्डर पर होने वाली परेड अपनी तरह का अनोखा कार्यक्रम है। दुनिया में कहीं भी ऐसा कार्यक्रम नहीं होता। यही वजह है कि दोनों ही देशों की ओर से विदेशी व देशी टूरिस्ट बड़ी संख्या में इसे देखने आते हैं। यह परेड शाम के वक्त बॉर्डर के गेट बंद होने से पहले होती है। अब अगले चरण के निर्माण कार्य में कई और सुविधाएं देने की तैयारी भी की जा रही है।

म्यूजियम और अस्पताल तैयार

केंद्रीय लोकनिर्माण विभाग की तरफ से यहां म्यूजियम, प्रदर्शनी स्थल-कम-किताबों की दुकानें, 20 बेड का अस्पताल तैयार किया गया है। बीएसएफ के लिए यहां कांफ्रेंस हाल का निर्माण किया गया है। इसमें 11 कमरों के अलावा गार्ड रूम भी बनाया गया है।

कैफेटेरिया और स्थायी इंतजार कक्ष का निर्माण जल्द

गैलरी तैयार होने के बाद अब इसके सेकेंड फेज में यहां एक कैफेटिरिया, एक म्यूजिकल फाउंटेन और सैलानियों के स्थाई इंतजार कक्ष बनाए जाने के साथ साथ वाहनों के लिए पार्किंग प्रबंधों के साथ ही दर्शक गैलरी में चार लिफ्ट लगाए जाएंगे। बता दें कि क्षमता कम होने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। यही नहीं, परेड स्थल के आसपास न तो सुनियोजित मार्केट है और न ही कोई रेस्तरां। लोगों को पटरी पर चाय और खाने-पीने का सामान बेचने वालों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

1959 लगातार जारी है शाम के समय रीट्रीट सेरेमनी

अटारी के ज्वाइंट चेक पोस्ट पर बीएसएफ तथा पाक रेंजर्स 1959 लगातार रोजाना सायं को परेड का आयोजन किया जा रहा है। दोनों देशों के सुरक्षा बलों द्वारा सम्मान के साथ अपने-अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज को उतारा जाता है। राष्ट्रीय ध्वज उतारने का संकेत भारत-पाक सीमा रास्ते को बंद करना है। 

 

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