खुशखबर: अमृतसर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का 95 फीसद निर्माण हुआ, अगले माह शुरू होगी ओपीडी

कैंसर के उपचार के लिए अमृतसर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का निर्माण अंतिम चरण में है।

JagranMon, 29 Nov 2021 05:00 AM (IST)
खुशखबर: अमृतसर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का 95 फीसद निर्माण हुआ, अगले माह शुरू होगी ओपीडी

नितिन धीमान, अमृतसर: कैंसर के उपचार के लिए अमृतसर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का निर्माण अंतिम चरण में है। सरकारी मेडिकल कालेज स्थित इस इंस्टीट्यूट की इमारत का 95 फीसद काम मुकम्मल हो चुका है। 114 करोड़ की लागत से बन रही पांच मंजिला इमारत का फ्रंट एलिवेशन भी तैयार है। दिसंबर के अंत तक यह इमारत तैयार हो जाएगी। इसके बाद चिकित्सा उपकरण इंस्टाल करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो तकरीबन दो माह में संपन्न होगी। इसके बनने के बाद लोगों को पीजीआइ चंडीगढ़ की तरह यहां पर कैंसर का उपचार मिलेगा।

दरअसल, मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग के तत्कालीन मंत्री ओमप्रकाश सोनी ने कैंसर इंस्टीट्यूट की डेडलाइन अक्टूबर माह तक रखी थी। इसके बाद इंस्टीट्यूट के निर्माण ने रफ्तार पकड़ी। इसके बाद सरकार की ओर से डा. राजकुमार वेरका को मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग का दायित्व सौंपा गया। डा. वेरका ने भी इंस्टीट्यूट के निर्माण में तेजी लाने के अधिकारियों को आदेश जारी किए। मंत्री डा. वेरका ने कैंसर इंस्टीट्यूट में बुनियादी ढांचा उपलब्ध करवाने के लिए 30 नवंबर को चंडीगढ़ में बैठक बुलाई है। इसमें विभाग के सचिव, डायरेक्टर सहित मेडिकल कालेज के प्रिसिपल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट शामिल होंगे। फरवरी 2022 में कैंसर इंस्टीट्यूट की शुरुआत होने की संभावना है। दिसंबर में शुरू होगी ओपीडी

इसी वर्ष दिसंबर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में ओपीडी सेवाएं शुरू हो जाएंगी। इसमें कैंसर रोग विशेषज्ञ सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक कैंसर मरीजों की जांच करेंगे। इंस्टीट्यूट के पहले व दूसरे तल को पूरी तरह तैयार किया जा रहा है। ओपीडी के बाद आइडीपी यानी इंडोर पेशेंट डिपार्टमेंट शुरू किया जाएगा। इसमें कैंसर मरीजों को दाखिल कर उपचार दिया जाएगा। अभी 100 से अधिक मरीजों का मेडिकल कालेज में हो रहा उपचार

मेडिकल कालेज में कैंसर मरीजों के उपचार के लिए पूर्व में कोबाल्ट यूनिट में अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेटर मशीन इंस्टाल की गई है। 13 करोड़ की यह मशीन केवल उसी हिस्से पर रेडिएशन देती है जहां कैंसर कोशिकाएं हैं। यूं कहिए कि कैंसर कोशिकाओं को ही नष्ट करती है। पूर्व में भाभा ट्रोन व थैरा ट्रोन मशीनें भी यहां इंस्टाल हैं। ये सभी मशीनें स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में स्थानांतरित की जाएंगी। वर्तमान में मेडिकल कालेज में प्रतिदिन 50 मरीजों को रेडिएशन, 40 को कीमोथैरेपी दी जाती है। इसके अतिरिक्त 50 से अधिक मरीज उपचार के बाद फालोअप के लिए यहां आते हैं। ये मरीज अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर से आते हैं। निर्माण में देरी से लोगों में निराशा

कैंसर इंस्टीट्यूट को वर्ष 2016 में हरी झंडी मिली थी। केंद्र व पंजाब सरकार के सहयोग से बनाए जाने वाले इस इंस्टीट्यूट के निर्माण में देरी से लोगों में काफी निराशा है। बहरहाल, इस इंस्टीट्यूट में कैंसर के उपचार के साथ-साथ युवा डाक्टरों को कैंसर के उपचार की प्रक्रिया, अनुभवी डाक्टरों की ओर से कैंसर पर शोध इत्यादि कार्य किए जाएंगे। इसका लाभ पंजाब के अलावा हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के लोग भी उठा सकेंगे। सफाई का होगा ठेका, दिसंबर में टेंडर हो सकता जारी

मेडिकल कालेज में सफाई का टेंडर जारी किया जाएगा। पूर्व में नियमित सफाई कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने नई भर्ती नहीं की। 500 से अधिक पदों पर महज 80 सफाई सेवक कार्यरत हैं। अस्पताल व मेडिकल कालेज में नई इमारतें बन चुकी हैं। ऐसे में सफाई व्यवस्था सुचारू रखना जरूरी है। इसके लिए अब सरकार सफाई का ठेका देने की योजना पर काम कर रही है। संभावना है दिसंबर में टेंडर जारी हो।

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