मार्केट में करोड़ों का व्यापार, कोरोना ने व्यापारियों को किया लाचार

यहां स्थिति शास्त्री मार्केट व्यापारिक दृष्टि से प्रदेश की एक बड़ी मार्केट में शुमार है। यहां मार्केट में करोड़ों का व्यापार होता है तथा दूसरे प्रदेशों में काफी संख्या में ग्राहक आते हैं लेकिन इस समय हालात बिल्कुल विपरीत है। दुकानदारों का कहना है कि मार्केट मंदी के दौर में गुजर रही है। किसी भी सरकार से कोई आशा नहीं है कि कोई सहायता करेगा।

JagranThu, 29 Jul 2021 12:00 PM (IST)
मार्केट में करोड़ों का व्यापार, कोरोना ने व्यापारियों को किया लाचार

कमल कोहली, अमृतसर : यहां स्थिति शास्त्री मार्केट व्यापारिक दृष्टि से प्रदेश की एक बड़ी मार्केट में शुमार है। यहां मार्केट में करोड़ों का व्यापार होता है तथा दूसरे प्रदेशों में काफी संख्या में ग्राहक आते हैं, लेकिन इस समय हालात बिल्कुल विपरीत है। दुकानदारों का कहना है कि मार्केट मंदी के दौर में गुजर रही है। किसी भी सरकार से कोई आशा नहीं है कि कोई सहायता करेगा। प्रभु आसरे ही दुकानों के खर्चे निकाले जा रहे हैं। पहले जिन दुकानदारों के पास तीन से चार का स्टाफ होता था वहां पर एक ही रह गया है। इसके अलावा कई दुकानदारों का कहना है कि अब तो खर्चे निकलना भी मुश्किल है। दुकान में लगाई हुई पूंजी को ही समाप्त कर रहे हैं। चाहे केंद्र की सरकार हो या पंजाब की किसी ने व्यापारियों की कोई मदद नहीं की है तथा ना ही उनसे कोई आस है। कारोबारियों को मेडिकल की सुविधा देनी चाहिए। बिजली के बिलों को माफ करना चाहिए तथा अन्य सुविधाएं देकर उनकी सहायता करनी चाहिए। यह समय की पुकार है। हरेक दुकानदार कर्जे में डूबता जा रहा है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। सरकार को कारोबार करने वाले लोगों की कोई फिक्र नहीं है। दुकानदार मंदी के दौर में खुद ही खर्चा कर रहे हैं। दुकान में लगाई हुई पूंजी ही अब उनकी जीविका का साधन बन चुकी है।

पीयूष खन्ना, दुकानदार कारोबार बिल्कुल नहीं है। मंदी का दौर चल रहा है। मार्केट में पार्किंग की समस्या भी जटिल बनी हुई है। वाहन रखना मुश्किल होता है। सरकार कोई मदद नहीं कर रही है, जिससे खर्चे निकलना काफी मुश्किल है।

शिव कपूर, दुकानदार अब सिर्फ व्यापार 30 प्रतिशत ही रह गया है, जिससे खर्चे निकलना मुश्किल है। दुकानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को वेतन देना भी समस्या बनता जा रहा है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। यदि हालात ऐसे रहे तो दुकानों को ताले भी लग सकते हैं। सरकार को आर्थिक सहायता देनी चाहिए।

रमन खन्ना, दुकानदार बाजार में पार्किंग स्थल ना होने की समस्या है। कोविड-19 के कारण दुकानदारों को मंदी के दौर में गुजरना पड़ रहा है। सरकार को दुकानदारों को विशेष आर्थिक पैकेज देना चाहिए।

रजत कुमार, दुकानदार दुकानदारों के खुद के खर्चे नहीं निकल रहे तो दुकानों के खर्चे कैसे निकालेंगे। सरकार को आर्थिक सहायता देनी चाहिए थी। शास्त्री मार्केट में व्यापार बिल्कुल बंद पड़ा है। कई दुकानें बंद पड़ी है। सरकार को आर्थिक पैकेज का ऐलान करना चाहिए।

अजय कपूर, दुकानदार समस्या गंभीर बनती जा रही है। किसी भी सरकार ने कोई मदद नहीं की है। दुकानदार कर्ज के बोझ में दबे जा रहे हैं। कर्मचारियों का खर्चा निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। यदि हालात ऐसे रहे तो काफी लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

रोहित मेहरा, दुकानदार टूरिस्ट ना आने के कारण व्यापार काफी प्रभावित हो रहा है। कई दुकानें टूरिस्ट के आने से ही चलती हैं। जब तक टूरिस्ट का आवागमन शुरू नहीं होता है। तब तक मंदी का दौर बाजारों में रहेगा। इस समय लोगों के पास परचेसिग पावर की कमी है। सरकार को भी दुकानदारों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

संजय विज, दुकानदार सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। अगर पार्किंग बन जाए तो काफी समस्याएं हल हो सकती है। इसे बाजार में ग्राहक भी बढ़ेगा। इस समय कोविड-19 की मार सभी दुकानदारों को पड़ी है। सरकार को दुकानदारों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

गगन जोशी, दुकानदार अमृतसर में ज्यादातर व्यापार टूरिस्ट के सहारे हैं। यदि टूरिस्ट नहीं है तो व्यापार भी नहीं है। इस समय सिर्फ दुकान पर बैठकर ही दुकानदार समय व्यतीत कर रहे हैं। सरकार ने कोई सहायता नहीं दी है। डीजल पेट्रोल महंगा है, जिससे हर एक वस्तु महंगी हो रही है।

मनजीत सिंह, दुकानदार इस बार सीजन मंदी के दौर में चला गया है। खर्चे निकालना मुश्किल है। यदि हालात ऐसे ही रहे तो घर के खर्चे भी निकालना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को दुकानदारों को विशेष पैकेज देना चाहिए।

अनूप सिंह लाडी, दुकानदार मार्केट में पार्किंग की समस्या जटिल बनी हुई है। दुकानदारों के पास कारोबार बिल्कुल नहीं है। कोई ग्राहक नहीं आता है। कई दुकानें तो बंद रहती है। खर्चे निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।

अरुण कुमार, दुकानदार समस्याएं गंभीर है। सीजन नहीं चल रहे हैं। उनका कारोबार टूरिस्ट के सहारे हैं। खर्चे निकलना मुश्किल हो गया है। दुकान पर लगे कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया है। सरकार को सहायता करनी चाहिए।

अजय अबरोल, दुकानदार

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