घर पहुंची तो फूट पड़े युवती के आंसू, कहा- विदेश में झेली यातना, दो बार बिकी

जेएनएन, अमृतसर। बेहतर जिंदगी और परिवार की वित्तीय मदद का सपना लेकर विदेश गई जालंधर की युवती दो बार बेची गई। मस्कट (ओमान) में उसने नौ महीने पशुओं के बाड़े में पशुओं की जिंदगी बिताई। वह सरबत दा भला ट्रस्ट के प्रमुख डॉ. एसपी सिंह ओबराय के प्रयासों से वतन लौटी। श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुंचने पर वह अपने पिता व मां के गले लगकर फूट-फूट कर रोई।

जालंधर के शाहकोट कस्बा के एक गांव की रहने वाली युवती ने बताया कि वह नवंबर 2017 में यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) गई थी। वहां एजेंट ने उसे 14000 दुबई करंसी में बेच दिया। उसके बाद एजेंटों ने उसे गैर कानूनी तौर पर मस्कट में भेजकर वहां के एक जमींदार को 1400 ओमान की करंसी में बेच दिया। उसका मालिक पिस्तौल से डरा कर उससे सुबह से रात तक पशुओं की देखभाल व घरेलू काम करवाता था।

युवती के मुताबिक उसे पशुओं के बाड़े में ही रखा जाता था। कभी बीमार पड़ने पर काम करने से मना करती तो उसके साथ पशुओं की तरह व्यवहार और अत्याचार किया जाता। उसने फरवरी 2018 में अपने परिजनों को फोन कर कहा कि अगर 1400 ओमान की करंसी (2 लाख 37 हजार रुपये) उसके मालिक के खाते में डाल दें तो वह भारत लौट सकती है।

इसके बाद युवती के पिता ने शाहकोट की मसीही चौकी में ट्रैवल एजेंट सुखदेव सिंह निवासी तलवंडी बुट्टियां, जालंधर के खिलाफ शिकायत दी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। युवती ने कहा कि फर्जी एजेंट लड़कियों को खूबसूरत जिंदगी का झांसा देकर खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य देशों में बेच देते हैं। अगर सरबत दा भला ट्रस्ट के प्रमुख डॉ. एसपी सिंह ओबराय मस्कट में उसके मालिक को खरीदी गई रकम नहीं देते तो वह कभी अपने देश नहीं लौट पाती।

युवती के पिता ने कहा कि ट्रैवल एजेंट सुखदेव सिंह ने 90 हजार रुपये लेकर उसकी बेटी को यूएई भेजा था। ट्रस्ट के माझा जोन प्रधान सुखजिंदर सिंह हेर, उपप्रधान मनप्रीत सिंह संधू और शिशपाल सिंह लाडी ने बताया कि डॉ. ओबराय ने युवती को रिहा करवाने के लिए 2 लाख 37 हजार रुपये दिए हैं।

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