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डीएसपी व उनकी पत्नी सहित 14 कोरोना पॉजिटिव, 25 वर्षीय युवक की मौत

जागरण संवाददाता, अमृतसर

कोरोना वायरस से गुरु नगरी में 47वीं मौत हो गई। मृतक 25 वर्षीय युवक था और गुरुनानक देव अस्पताल में उपचाराधीन था। भगत सिंह कॉलोनी में रहने वाले इस युवक ने शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अमृतसर में कोरोना संक्रमित 47 लोगों की मौत हो चुकी है। वही, शनिवार को जंडियाला गुरु के डीएसपी व उनकी पत्नी सहित 14 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज रिपोर्ट हुए हैं। दुर्भाग्यवश ऐसा कोई दिन नहीं निकल रहा जब कोरोना पॉजिटिव मरीज रिपोर्ट न हो रहे हों।

शनिवार को रिपोर्ट हुए मरीजों में आठ ऐसे हैं जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं। यानी ये कम्युनिटी में कोरोना की घुसपैठ होने से संक्रमण ग्रस्त हुए। वहीं छह पॉजिटिव मरीज कांटेक्ट से हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस भी को होम आइसोलेट कर दिया है। 14 मरीज हुए स्वस्थ, एक्टिव केस 142

राहत भरी खबर यह है कि शनिवार को 14 मरीजों ने कोरोना को मात दी। अमृतसर में अब एक्टिव केस 142 हैं और इनमें से 95 प्रतिशत के रिकवर होने की संभावना है। पंजाबियों की मजबूत इम्युनिटी के आगे कोरोना वायरस बेबस हैं। लापरवाही, अब तक 25 फीसद कांटेक्ट ही तलाशे

कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर जहां दिन रात मरीजों की सेवा में जुटे हैं, वहीं विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से कोरोना का प्रसार हो रहा है। दरअसल, कोरोना मरीजों के कांटेक्ट ढूंढ़ने में विभागीय अधिकारी असफल साबित हुए हैं। एक कोरोना मरीज मिलने पर उसके कम से कम दस कांटेक्ट तक विभागीय अधिकारियों को पहुंचना लाजमी है, पर अमृतसर में अब तक सिर्फ 25 फीसद कांटेक्ट की तलाशे जा सके हैं। स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी फील्ड में नहीं उतरते। दूसरी लापरवाही यह है कि सिविल अस्पताल स्थित आइडीएसी लैब में सैंपलों की टेस्टिग की प्रक्रिया धीमी रही। यहां कई सैंपलों को दस-दस दिन दबाए रखा गया, टेस्टिग के लिए नहीं भेजा गया। आज भी इस लैब में लोग एक सप्ताह पुराने सैंपलों की रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए पहुंच रहे हैं। जमीन पर उतरकर काम नहीं कर रहे अधिकारी

कोरोना काल में डॉ. सुजाता शर्मा को मेडिकल कॉलेज के प्रिसिपल पद से हटा दिया गया। उन पर आरोप लगाया कि वह कोविड-19 ग्रसित मरीजों की मौतों को रोकने में नाकाम साबित हुईं। खैर, सरकार के इस फैसले को मानकर डॉ. सुजाता शर्मा ने पद छोड़ दिया, पर स्वास्थ्य विभाग में ऐसे भी अनेकानेक अधिकारी हैं जो सिर्फ कोरोना का होहल्ला मचाकर घर चले जाते हैं। जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे।

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