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कोरोना का संकट, न्याय में देरी

जागरण संवाददाता, अमृतसर

कोरोना वायरस ने न्यायपालिका के कामकाज को भी प्रभावित किया है। किसी भी केस की सुनवाई न हो पाने के कारण लाखों लोगों को इंसाफ मिलने में देरी हो रही है, जिससे उनमें बेबसी का आलम है।

स्थानीय अदालतों में कई अहम केस जैसे अकाली नेता मुक्खा हत्याकांड, 197 किलो हेरोइन तस्करी मामला, 534 किलो हेरोइन मामला, इंद्रजीत सिंह चड्ढा सुसाइड जैसे केसों पर शहर के कई लोगों की नजरें लगी हुई थी, लेकिन कोरोना की मार के कारण सभी केसों की सुनवाई रोकी जा चुकी है।

न्यायाधीश वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए जरूरी कार्य, जमानत और रिमांड का काम ही देख रहे हैं। महानगर में कुल 34 अदालतों में रोजाना 90 से 145 केसों की सुनवाई होती है। लेकिन कोरोना वायरस की छाया पड़ते ही शुरुआती दौर में केवल एक न्यायाधीश (ड्यूटी मजिस्ट्रेट) को ही कोर्ट में कामकाज देखने के लिए लगाया गया था। जैसे-जैसे हालात ठीक होते गए तो न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई। जिससे न्यायपालिका के काम ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली। इसके बावजूद केसों की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो पाई। वर्तमान में आठ न्यायाधीश जरूरी कार्य, जमानत और रिमांड का काम ही देख रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो पिछले दो महीने में अदालत के काम में केवल तारीखें ही पड़ रही हैं।

19 मार्च को हत्या प्रयास के मामले में सुनाई थी सजा

जज बलविदर सिंह ने 19 मार्च को हत्या प्रयास के एक मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई थी। उसके बाद कोरोना वायरस को रोकने के लिए सरकार की तरफ से लगाए गए क‌र्फ्यू और गाइडलाइन का पालन करते हुए सभी अदालतें बंद कर दी गई थीं। अब कोर्ट में हत्या प्रयास, दुष्कर्म, हत्या, फिरौती, दहेज प्रताड़ना और झपटमारी जैसे कई अपराधों के मामलों पर सुनवाई लटकी हुई है। आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना 32 अदालतों में 4200 केसों पर सुनवाई होती है। (जमानत और रिमांड अलग हैं।) प्रति माह यह संख्या 1,27,500 आंकी जा रही है। कोरोना काल खत्म होते ही ट्रैक पर आएगा काम

बार एसोसिएशन के सचिव इंद्रजीत सिंह अड़ी ने बताया कि जैसे ही कोरोना काल समाप्त होगा। अदालतों का काम ट्रैक पर आ जाएगा। बीते समय में हुई देरी को न्यायपालिका के अफसर जल्द से जल्द कवर करने का प्रयास करेंगे।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट का है यह काम

पांच बजे कोर्ट बंद होने के बाद नियमानुसार एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट को नियुक्त किया जाता है। यहीं नहीं छुट्टी वाले दिन भी एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट शहर के जरूरी कार्य, जमानत और रिमांड जैसे काम का निपटारा करते हैं। यह कोर्ट के अलावा अपने आवास पर भी सुनवाई कर सकते हैं।

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